पाली शहर के सूरजपोल चौराहे के निकट रविवार रात सवा 8 बजे विधि-विधान से पूजन कर गांवशाही होली का डंडा रोपा किया। अब इस दौरान लोगों ने चंग की थाप पर फाग गीत गाए। अब अगले एक महीने तक फाग गीत टोलियां यहां चंग की थाप पर गाती नजर आएगी और अगले एक महीने तक मांगलिक कार्यक्रम नहीं होंगे। बता दे कि इस बार 03 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा।
गुड़ खिलाकर दी शुभकामना
इससे पहले सभी आई माता वडेर से चंग बजाते हुए टोली के रूप में लोग सूरजपोल चौराहे पर पहुंचे। जहां पिछले करीब 51 सालों से गांवशाही होली का डंडा रोपित किया जाता है। वहां युवा टीम की ओर से लाई गई होली का पूजन कर विधि-विधान से उसे रोपा गया। खुशी में एक-दूजे को गुड़ खिलाकर शुभकामना दी गई। 1 महीने पहले रोपा जाता है होली का डांडा
नारायण चौधरी ने बताया कि बताया कि होली से एक माह पहले होली का डांडा रोपा जाता है। परम्परा के अनुसार, होली का आगाज डांडा रोपण से होता है। आज भी यह परम्परा पाली में निभाई जाती है। जिस स्थान पर होलिका दहन होता है, वहां एक बड़ा सा डंडा लगाया जाता है। यह डंडा भक्त प्रहलाद का प्रतीक होता है। होली का दहन से ठीक पहले इसे सुरक्षित निकाल लिया जाता है। फाल्गुनी लोक गीतों का महत्व
डांडा रोपण के साथ ही शहर एवं गांवों में फाल्गुन और होली लोक गीतों की बयार शुरू हो गई है। अब अगले एक महीने तक देर रात तक गली-मोहल्लों में चंग की थाप के साथ होली के गीतों की धमाल रहेगा।
फाल्गुन के महीने में मंदिरों में भी फागोत्सवों की धूम रहेगी। भक्तों की ओर से मंदिरों में भगवान को गुलाल व फूलों से होली खिलाई जाएगी।


