पाली शहर के पूनायता एरिया में सोमवार रात प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मेगा टाउनशिप के पास सरकारी जमीन पर संचालित अवैध धुलाई प्लांट को पकड़ा। टीम के पहुंचते ही वहां काम कर रहे लोग अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। मौके पर फैक्ट्रियों में तैयार रंगीन कपड़ों की धुलाई की जा रही थी और उसका दूषित पानी सीधे जमीन में डिस्चार्ज कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। प्रशासन को यहां 10 पक्के होद (टैंक) बने मिले, जिनमें कपड़ों की धुलाई की जा रही थी। फिलहाल यह अवैध प्लांट कौन संचालित कर रहा था, इसे लेकर जांच शुरू कर दी गई है। JCB से तोड़े 10 वाटर टैंकर, कपड़े और मशीन जब्त कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने जेसीबी की मदद से मौके पर बने 10 होदों को ध्वस्त कर दिया। साथ ही सैकड़ों कपड़ों के थान, एक लोडिंग टेम्पो और एक मशीन जब्त की गई। जांच में सामने आया कि फैक्ट्रियों में तैयार कपड़ों को यहां लाकर धोया जाता था और उसके बाद निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी वहीं सरकारी जमीन पर छोड़ दिया जाता था। इससे जमीन प्रदूषित हो रही थी और आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका थी। कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई मौके पर पहुंचे तहसीलदार कल्पेश जैन ने बताया- कलेक्टर के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। अवैध प्लांट संचालक की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नगर निगम की ओर से संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार यूआईटी महावीर सीलू, नगर निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज, आरटीओ इंस्पेक्टर मिनाक्षी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहे। जलता चूल्हा छोड़कर भागे लोग पूनायता के निकट जहां यह प्लांट संचालित हो रहा था, वह स्थान जंगल जैसा प्रतीत हो रहा था। टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद लोग जलता हुआ चूल्हा छोड़कर भाग गए। मौके पर पेड़ से टंगी बच्चों की झोली, घरेलू सामान और चाय की भगोली मिली। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि प्लांट की निगरानी के लिए वहां लोगों को रखा गया था और वे अस्थायी रूप से वहीं रह रहे थे। यह पूरा प्लांट मुख्य सड़क से करीब आधा किलोमीटर अंदर कच्चे रास्ते के जरिए पहुंचने वाले स्थान पर बनाया गया था, ताकि गतिविधियां छिपी रह सकें। जांच के बाद दर्ज होगा मामला प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्लांट संचालक की पहचान होते ही उसके खिलाफ नगर निगम की ओर से मामला दर्ज कराया जाएगा।


