जिले के एकमात्र शुगर मिल करकाभाट में 16वंे सीजन में 36 हजार 718 टन गन्ने की पेराई से 37 हजार 389 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ है। जिसकी पुष्टि सोमवार को कारखाना प्रबंधन ने की है। दावा किया जा रहा है कि मशीनों से शक्कर निकालने का सिलसिला अब तक जारी है। इस वजह से उत्पादन आंकड़ा बढ़ते क्रम पर रहेगा। फिलहाल की स्थिति में 15वें सीजन की तुलना में 16वें सीजन मंे 27 हजार 929 टन कम गन्ने की पेराई हुई है। इसके अलावा 29 हजार 293 क्विंटल कम शक्कर उत्पादन हुआ है। प्रबंधन के अनुसार 15वें सीजन में 64 हजार 647 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई से 66 हजार 682.5 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ। रिकवरी रेट 10.50% रहा। जबकि इसके पहले 14वंे सीजन में 69 हजार 175 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई से 75 हजार 132 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ था। रिकवरी रेट 11% रहा। जबकि इस बार रिकवरी रेट 10.35% है। इस लिहाज से पिछले दो सीजन की तुलना में इस बार रिकवरी रेट के साथ पेराई, उत्पादन कम हुआ है। पिछले सीजन की तुलना में रिकवरी रेट 0.15% और दो साल पहले की तुलना में 0.65% कम रहा। हालांकि फाइनल रिपोर्ट जारी होने के बाद आंकड़े में थोड़ा बदलाव हो सकता है। पिछले दो सीजन से पेराई व उत्पादन में गिरावट 14वें सीजन की तुलना में 15वें सीजन में 4 हजार 528 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई कम हुई थी। जिसके चलते 8 हजार 450 क्विंटल शक्कर उत्पादन कम हुआ था। पिछले दो सीजन से पेराई व उत्पादन कम हो रहा है। पेराई व शक्कर उत्पादन कम होने की मुख्य वजह गन्ने की कमी है। जिसे कारखाना प्रबंधन भी स्वीकार कर रही है। एमडी राजंेद्र राठिया, जीएम एलके देवांगन के अनुसार इस बार कम किसानों ने कम मात्रा में गन्ना बेचा। जिसका असर पेराई व उत्पादन पर पड़ा। इस बार पेराई के लिए बालोद जिले के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से भी कम गन्ना उपलब्ध हो पाया। दूसरे जिलों से गन्ना नहीं आने से पेराई प्रभावित बेरला व अन्य जिले के किसानों के माध्यम से पहले की तरह ज्यादा मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं होने की वजह से पेराई, उत्पादन प्रभावित रहा। इस बार 60 से 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना पहुंचने का अनुमान था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। स्थिति ऐसी रही कि किसानों ने 40 हजार टन से कम गन्ना बेचा। जिसके चलते रिकवरी रेट से लेकर पेराई, उत्पादन पर असर पड़ा। हालांकि रिकवरी रेट लगातार 6वीं बार 10 प्रतिशत से ज्यादा रहा। जिसे विभागीय अफसर शुभ संकेत मान रहें है। हालांकि विभागीय अफसरांे का कहना है कि जिले से ज्यादा मात्रा में गन्ना उपलब्ध होता तो स्थिति और बेहतर होती।


