पीएफ-ईएसआई नहीं, सुरक्षा भी अधूरी… 40% लेबर कच्चे में, मजदूरों का काम करना मुश्किल

यूनियन प्रधान चितरंजन कुमार ने बताया कि पिछले दो महीनों में 20 कंपनियों की शिकायत पीएफ विभाग को भेजी गई है। इन कंपनियों में 300 से 400 मजदूर कार्यरत हैं, लेकिन पीएफ और ईएसआई की सुविधा केवल 100 कर्मचारियों को ही मिल रही है। उनका कहना है कि मशीनों पर काम करने के दौरान यदि कोई हादसा हो जाता है तो प्रभावित कर्मचारी को मुआवजा तक नहीं मिलता। मजदूर नेताओं का आरोप है कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए शहर में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। आए दिन लूटपाट की घटनाएं होती हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं करती। इसके चलते मजदूर अपने गृह राज्यों में ही रोजगार को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उद्योग जगत का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उत्पादन और निर्यात पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी करना शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। भास्कर न्यूज |लुधियाना औद्योगिक शहर लुधियाना में श्रमिकों की कमी दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेती जा रही है। उद्योग संगठनों के अनुसार लेबर की घटती संख्या का सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। पहले जहां करीब 12 लाख प्रवासी मजदूर शहर की फैक्ट्रियों में काम करते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 9 लाख रह गई है। अधिकतर मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार से आते हैं, लेकिन सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में वे वापस अपने राज्यों का रुख कर रहे हैं। अखिल भारतीय मजदूर यूनियन ने इस मामले को लेकर पीएफ कमिश्नर को शिकायत भेजी है। यूनियन का आरोप है कि बहादुर के रोड, इंडस्ट्रियल एरिया और फोकल पॉइंट स्थित कई फैक्ट्रियों में केवल 60 प्रतिशत कर्मचारियों को ही स्थायी तौर पर रखा गया है, जबकि बाकी को कच्चे कर्मचारी के रूप में काम कराया जा रहा है। इन श्रमिकों को न तो भविष्य निधि (PF) का लाभ दिया जा रहा है और न ही कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) कार्ड बनाया जा रहा है।

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