पीएमओ बोले- ‘अगली बारिश नहीं झेल पाएगा उप जिला अस्पताल’:नावा के सरकारी हॉस्पिटल का आधे से ज्यादा हिस्सा कंडम घोषित

डीडवाना–कुचामन जिले के नावा उपखंड मुख्यालय स्थित नावा का उप जिला चिकित्सालय इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। एक ओर अस्पताल का भवन जर्जर और कंडम घोषित किया जा चुका है, तो दूसरी ओर चिकित्सकों की भारी कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं को लगभग ‘राम भरोसे’ छोड़ दिया है। ऐसे हालात में रोजाना सैकड़ों मरीज अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। पीएमओ श्रवण कुमार नायक के अनुसार, इस बिल्डिंग के 70% हिस्से को PWD द्वारा कंडम घोषित किया जा चुका है हमने आला अधिकारीयों को जब तक नया भवन नहीं बन जाता तब तक अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग की है। यह बिल्डिंग बारिश को नहीं झेल पाएगी। डीडवाना कुचामन CMHO डॉ नरेंद्र चौधरी ने बताया कि जो डैमेज पार्ट है उसको परमानेंट बंद करवा दिया गया। हम कोशिश कर रहे हैं कि जब तक नई बिल्डिंग नहीं बन जाती कोई भवन मिल जाए। अब नए भवन की बिल्डिंग का टेंडर हो चुका है और जल्द ही नया भवन मिल जाएगा। जर्जर भवन में चल रहा अस्पताल हाल ही में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा उप जिला चिकित्सालय के भवन को जर्जर और कंडम घोषित किया गया है। विभागीय रिपोर्ट में भवन की संरचना को असुरक्षित बताया गया है, बावजूद इसके अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं के लिए पहुंच रहे हैं। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकने, दीवारों में दरारें और प्लास्टर झड़ने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। मरीजों और उनके परिजनों के मन में हर समय यह भय बना रहता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन में शिफ्टिंग नहीं की गई, तो किसी भी दिन गंभीर दुर्घटना हो सकती है। प्रशासन की अनदेखी से क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश है। डॉक्टरों की भारी कमी, कागजों में ही पूरी संख्या अस्पताल में स्वीकृत डॉक्टरों के कुल 33 पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 11 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 11 में से भी मात्र 7 डॉक्टर ही प्रतिदिन नावा उप जिला चिकित्सालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष 4 डॉक्टर डेपुटेशन पर अन्य स्थानों पर तैनात हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नियुक्त डॉक्टरों को स्थायी रूप से नावा में ही तैनात रखा जाए, तो अस्पताल की हालत में काफी सुधार हो सकता है। डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे डॉक्टर— डॉ. पूजा– सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर डॉ. विवेकशील मीणा (नेत्र रोग विशेषज्ञ)- Government Medical College Alwar डॉ. कल्पना- Jawaharlal Nehru Hospital Ajmer डॉ. नीलम – SMS Medical College Jaipur गंभीर मामलों में तुरंत रेफर डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में गंभीर एक्सीडेंट, हार्ट अटैक या अन्य जटिल बीमारियों के मामलों में प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को तुरंत बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। कई बार समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। नावा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को जयपुर, अजमेर जैसे शहरों में जाना पड़ता है। परिवहन, दवाइयों और निजी खर्चों के कारण गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है। 144 में से 73 पद खाली केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि अस्पताल में कुल स्वीकृत 144 स्टाफ पदों में से 73 पद अभी तक खाली हैं। नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और सहायक कर्मियों की कमी से भी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इससे कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। यहां प्रतिदिन 400 से 500 तक ओपीडी रहती है। जनता में आक्रोश और चिंता स्थानीय निवासी भंवर लाल कुमावत ने बताया कि यहां पहले तो बिल्डिंग जर्जर है जिसकी वजह से आमजन को खतरा है ऊपर से यहां डॉक्टर भी पुरे नहीं है जिसके कारण मरीजों को असुविधा होती है। क्षेत्र की जनता ने प्रशासन से मांगें- उपजिला चिकित्सालय भवन के लिए बजट व भूमि अलॉट होने बाद भी नही हो रहा निर्माण नावा उपजिला चिकित्सालय भवन निर्माण के लिए नावा शहर में 3 स्थानों पर अलग अलग भूमि अलॉट की गई और भवन निर्माण के लिए 42 करोड़ का बजट भी स्वीकृत किया जा चुका लेकिन आज दिन तल नावा शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रो के लोगो को उपजिला चिकित्सालय भवन नही मिल सका और ना ही उपजिला चिकित्सालय की सुविधा।

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