पीएम कर चुके हैं माइक्रोबायोलॉजी लैब का उद्घाटन:लैब शुरू फिर भी खुले में बिकने वाले खाने व पीने के सामान की जांच नहीं

बाजारों और मेलों में समोचे, चाट-गुपचुप के साथ चिकन, मटन और अंडे से बनी खाने की चीजें खुले में बिक रही हैं। ये खाद्य सामग्री कच्ची हो या पकी हुई, दोनों स्थिति में इनमें विषाक्त बैक्टीरिया पैदा होने का खतरा रहता है। इसके बावजूद फूड विभाग ने खाद्य सामग्री की माइक्रो बैक्टीरियल यानी विषाक्त बैक्टीरिया की नियमित जांच तो दूर अब तक एक सैपल भी परीक्षण के लिए नहीं लिया है। जबकि दो साल पहले ही विषाक्त बैक्टीरिया की जांच करने माइक्रोबायोलॉजी लैब शुरू हो चुकी है। खाद्य विभाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका वर्चुअल उद्घाटन करवाया था। उसके बाद भी जांच शुरू नहीं की गई। पड़ताल में पता चला है कि लैब के उद्घाटन के बाद जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। पिछले दो साल के दौरान अब तक केवल बोतल में बिकने वाले पैक पानी और पैकेट वाले दूध की ही जांच की जा रही है। जबकि पैकेट में बिकने वाले दूध और बोतलबंद पानी में बैक्टीरिया मिलने की संभावना पहले ही काफी कम रहती है। इसके बाद भी खाद्य विभाग के इंस्पेक्टरों का फोकस इन्हीं पर है। जबकि खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री में विषाक्त बैक्टीरिया मिलने के आसार ज्यादा होते हैं। उसके बावजूद अब तक पूरे प्रदेश में खुले में बिक रही एक भी खाद्य सामग्री का माइक्रोबायोलाजिकल टेस्ट के लिए सैंपल नहीं लिया गया है। पनीर और मिठाई के सैंपल लेते हैं लेकिन…
खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर अभी खुले में बिकने वाले पनीर, दूध, मिठाई, और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल जांच के लिए ले रहे हैं लेकिन उसमें विषाक्त बैक्टीरिया की जांच नहीं की जाती है। सैंपल कलेक्ट करने के बाद उसमें मिलावट और फैट की जांच की जाती है। मिठाई में रंगों की जांच की जाती है कि जिस रंग का उपयोग मिठाई बनाने में किया गया है वो खाने के योग्य और सुरक्षित है या नहीं। पनीर का सैंपल लेकर केवल ये देखा जाता है कि उसमें स्टार्च या सिंथेटिक दूध का उपयोग तो नहीं किया गया है। समोसा व पके हुए चिकन-मटन में ये देखा जाता है कि उसमें सस्ते और मिलावटी तेल का उपयेाग तो नहीं किया गया है। विषाक्त बैक्टीरिया की जांच नहीं की जा रही है। माइक्रोबायोलॉजिक जांच से हानिकारक बैक्टिरिया का पता चलता है
माइक्रोबायोलॉजिकल जांच से यह पता चलता है कि खाद्य सामग्री में हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हैं या नहीं। अगर मौजूद हैं तो उनकी संख्या कितनी है। बाजार में बिक रही खाद्य सामग्री जैसे चाट, समोसा, चिकन, मटन, अंडे में हानिकारक बैक्टीरिया तो नहीं हैं? भोजन में फफूंद की मात्रा इतनी तो नहीं है कि वह भोजन को विषाक्त बना सकती है। इसके अलावा खाद्य सामग्री में रोग पैदा करने वाले सूक्षम जीवो की पहचान होती है। ये जांच इसलिए जरूरी है क्योंकि दूषित भोजन से उल्टी दस्त और बुखार के साथ-साथ पेट में गंभीर संक्रमण हो सकता है। अफसर बेखबर… जांच का पता ही नहीं
भास्कर ने खाने-पीने की चीजों की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच न होने का कारण जानने आला अफसरों से संपर्क किया। इस बारे में फूड ऑफिसर डोमेंद्र ध्रुव को पता ही नहीं कि फील्ड में इंस्पेक्टर सैंपल ले रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा वे पता करेंगे कि फील्ड में सैंपल क्यों नहीं लिए जा रहे हैं।

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