750 कैमरों से होगी बाघों की सटीक संख्या की पुष्टि
पलामू व्याघ्र परियोजना (पीटीआर) में मिले बाघों के पगमार्क और राज्य के अन्य इलाकों में मूवमेंट के आधार पर वन विभाग ने दावा किया है कि झारखंड में बाघों की संख्या 6 तक हो सकती है। वहीं, 145 तेंदुआ के होने के भी सबूत मिले हैं। हालांकि सटीक संख्या जानने के लिए पीटीआर में 750 कैमरे लगाए गए हैं। जरूरत पड़ने पर यह संख्या एक हजार के पार भी जा सकती है। कैमरों में कैद तस्वीरों के डाटा का विश्लेषण वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया करेगा। अंतिम घोषणा वहीं से होगी। वन विभाग को पलामू, गढ़वा, लातेहार, हजारीबाग और चतरा समेत कई इलाकों में बाघों की आवाजाही के संकेत मिले हैं। वर्ष 2006 में पीटीआर में तीन बाघ बताए गए थे। 2018 में संख्या शून्य घोषित हुई थी। 2023 में फिर तीन बाघों की पुष्टि हुई। अगर इस बार संख्या 4 से 6 तक पहुंचती है तो यह झारखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। पूरे झारखंड में पहली बार एक साथ बाघ की गिनती : पहली बार सिर्फ पीटीआर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में बाघ की गिनती की जा रहा है। यह प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होगी। दो चरणों का काम खत्म हो चुका है और उनका डाटा नई दिल्ली भेजा जा चुका है। तीसरा चरण मार्च तक और अंतिम चरण जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। बता दें कि देशव्यापी टाइगर जनगणना 15 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ है, जिसे जून 2026 तक पूरा किया जाएगा। पांच जोन, 36 डिविजन व 1600 वनकर्मी गिन रहे हैं बाघों की गिनती के लिए झारखंड को पांच जोन और 36 डिविजन में बांटा गया है। इस कार्य में 1600 वनकर्मी लगे हैं, जबकि पीटीआर में 110 फॉरेस्ट गार्ड तैनात किए गए हैं। झारखंड में बाघों की गिनती के नोडल पदाधिकारी सह पीटीआर डायरेक्टर एसआर नटेश ने बताया कि सर्वे के दौरान अन्य मांसाहारी जीवों की भी गणना हो रही है। राज्य के सभी हिस्सों में तेंदुए की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। पीटीआर में करीब 145 तेंदुओं के प्रमाण मिले हैं। उन्होंने कहा कि कैमरा ट्रैपिंग का काम शुरू हो चुका है और पूरा क्षेत्र कैमरों से कवर है। पगमार्क के आधार पर संख्या 6 तक जा सकती है, लेकिन अंतिम पुष्टि कैमरा ट्रैपिंग के बाद ही होगी।


