पीबीएम हॉस्पिटल का मामला:12.50 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी यूरो साइंस की बिल्डिंग अनसेफ, वार्ड जर्जर

पीबीएम हॉस्पिटल परिसर में यूरोलॉजी विभाग के यूरो साइंसेज सेंटर की बिल्डिंग 9 साल में करीब 12.50 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी अनसेफ है। 100 बेड के सेंटर में 150 मरीज भर्ती हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी के मरीजों की डायलिसिस का हॉल ही जर्जर हालत में है। बिल्डिंग अधूरी और जर्जर होने के कारण किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू नहीं हो पा रही है। एसपी मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग के लिए दानदाता और यूआईटी ने मिलकर यूरो साइंसेज सेंटर के लिए अलग-अलग भाग का निर्माण कराया था। निर्माण कार्य 2008 से 2017 तक रुक-रुक कर होता रहा। हालात यह है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी दोनों ही भाग अधूरे पड़े हैं। छत पर वार्ड बनाए जाने थे, लेकिन नहीं बनाए गए। छत को भी ऐसे ही छोड़ दिया गया। बारिश के कारण पानी भरने से सरिए फूल चुके हैं। मरीजों के लिए लिफ्ट तक नहीं है। पीडब्ल्यूडी ने बिल्डिंग को अनसेफ घोषित कर दिया है। पिछले दिनों अहमदाबाद से आए इंजीनियरों ने बिल्डिंग को बंद करने का सुझाव दिया था। दरअसल इस बिल्डिंग के लिए शुरू में दानदाता ने 2.50 करोड़ दिए थे। बाद में दानदाता और यूआईटी ने 4.50-4.50 करोड़ खर्च करने की बात कही। बताया जा रहा है कि पूरा पैसा खर्च ही नहीं किया और बिल्डिंग को अधूरा छोड़ दिया गया। कॉलेज प्रशासन और यूआईटी ने भी इसकी कोई जांच तक नहीं कराई। अब इसे तोड़कर दोबारा तैयार कराने के लिए मेडिकल कॉलेज ने जिला कलेक्टर से डीएमएफटी के तहत बिल्डिंग के लिए 6.7 करोड़ रुपए मांगे हैं। भास्कर इनसाइट- उपकरणों के लिए 14 करोड़ नहीं मिल रहे यूरोलॉजी विभाग में उपकरणों की खरीद के लिए पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने सीएसआर फंड से 14 करोड़ रुपए देने का आश्वासन दिया था। यह पैसा समय पर नहीं मिला तो पीएम रिलीफ फंड में ट्रांसफर हो जाएगा। इसकी फाइल ऊर्जा विभाग में अटकी हुई है। कॉलेज प्रशासन कई बार चक्कर लगा चुका है, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। यदि यह बजट मिलता है तो यूरोलॉजी के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की जा सकेगी। इससे मरीजों का इलाज और सुगम हो सकेगा। किडनी ट्रांसप्लांट शुरू नहीं हो पा रहा संभाग के सबसे बड़े पीबीएम हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा यूरो साइंसेज बिल्डिंग के कारण शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि डॉक्टरों और स्टाफ की ट्रेनिंग हो चुकी है। सेंटर में 100 बेड के लिए माकूल वार्ड, 20 प्राइवेट कॉटेज और लिफ्ट की जरूरत बताई गई है। वर्तमान में 96 बेड हैं, लेकिन मरीजों का भार 150 प्रतिशत तक है। इस बिल्डिंग के आधुनिक तरीके से भव्य निर्माण होने पर संभाग के चारों जिलों सहित आसपास के 50 हजार से ज्यादा मरीजों को फायदा होगा। बिल्डिंग सिर्फ 40% ही बनी यूरो साइंसेज सेंटर की बिल्डिंग का काम 40 प्रतिशत ही हो पाया है। 60 फीसदी निर्माण कार्य बाकी है। मानव सेवा समिति ने करीब 60 लाख रुपए खर्च कर फर्नीचर उपलब्ध कराया, तब जाकर डॉक्टरों को बैठने के लिए टेबल-कुर्सियां नसीब हुईं। बिल्डिंग में दीवारें, छत, गुंबद, प्लास्टर, लैंडस्केपिंग, पार्किंग और लिफ्ट का काम बाकी पड़ा है। मेडिकल कॉलेज की एक रिपोर्ट में निर्माण कार्य घटिया स्तर का बताया गया है। ”यूरो साइंसेज सेंटर की बिल्डिंग निर्माण के लिए जिला कलेक्टर को प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी ने बिल्डिंग अनसेफ बता दी है। नया भवन बनने तक मरीजों को कहीं दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है।”
-डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा, प्रिंसिपल, एसपी मेडिकल कॉलेज

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *