बोकारो जिले के कई थाना इलाके में डीजल-पेट्रोल की चोरी जोरों पर है। खासकर यह चोरी एनएच पर अधिक हो रही है। इसमें टैंकरों से सप्लाई के लिए जा रहे डीजल और पेट्रोल को निकाला जा रहा है और उसे बेचा जा रहा है। इस चोरी की घटना में एक संगठित गिरोह सक्रिय है। बोकारो के बालीडीह, पिंड्राजोरा चास व चास मु. थाना क्षेत्र में इस प्रकार की चोरी खुलेआम और बेखौफ जारी है। ऐसा नहीं है कि संबंधित थाना को इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस टैंकर से चोरी करने वाले गिरोह, संबंधित होटल सबके बारे में पुलिस को जानकारी है। इस प्रकार की व्यापक तौर पर टैंकरों से डीजल-पेट्रोल की चोरी बिना पुलिस की मिली-भगत संभव नहीं है। आश्चर्यजनक रूप से इस अवैध गतिविधि पर अभी तक पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की है। डीजल-पेट्रोल की चोरी का गणित 10 से 20 मिनट में हो जाता है खेल बोकारो में है भारत पेट्रोलियम का डिपो बोकारो के बालीडीह थाना इलाके में ही भारत पेट्रोलियम का डिपो है। यहां से पूरे राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा आसपास के राज्यों में भी सैकड़ों टैंकरों से सप्लाई की जाती है। इस कारण भी बोकारो हॉट स्पॉट बन गया है। एक संगठित गिरोह इस अवैध धंधे में लगा हुआ है। पुलिस इस धंधे पर रोक लगाने की दिशा में अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। पुपुनकी टोल प्लाजा के पास टैंकर से पेट्रोल निकालते और दो गैलन में भरकर ले जाता गैेंग का सदस्य। टैंकर में 4 से 5 कंपार्टमेंट होते हैं। हरेक में 4 से 5 हजार लीटर तेल रहता है। एक टैंकर में कुल 20 से 25 हजार लीटर तेल होता है। टैंकर चालक व क्लीनर मिलकर 500 से 1000 लीटर तेल चुराते हैं। इसकी जगह मिलावटी पेट्रोल भर देते हैं। टैंकर से चुराए गए डीजल-पेट्रोल को 50 से 60 रुपए प्रति लीटर बेच देते हैं। इससे 50 से 60 हजार रुपये कमा लेते हैं। अब दुकान वाले या ट्रक चालक उस डीजल-पेट्रोल को 70 से 80 रुपए में खरीद लेते है। टैंकरों से डीजल-पेट्रोल की चोरी महज 10 से 20 मिनट में हो जाता है। उसके जगह एथेनॉल, थिनर, केरोसिन, केमिकल डालकर मिलावट किया जाता है। वर्तमान में तेल कंपनी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण करके सप्लाई कर रही है। इसके लिए टैंकर चालक सील खोलने और उपर के ढक्कन को खोलने के लिए स्पेशल चाभी भी रखते हैं। इसके बाद पाइप के जरिए या रिलीज आउटलेट के पास से सील खोलकर चोरी की जाती है।


