प्रतापगढ़ में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूर्व कांग्रेस विधायक रामलाल मीणा सोमवार को सैकड़ों समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस अत्याचार के खिलाफ धरना दिया। समर्थकों का आरोप है कि प्रतापगढ़ थाना क्षेत्र में एक ही रात में कानून, मानवाधिकार और पुलिस नियमों का उल्लंघन किया गया। धरने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा की समझाइश पर यह समाप्त हुआ। इसके बाद दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने तथा निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पार्षद शाकिर शेख ने अपने पिता अब्दुल हमीद शेख के साथ हुई घटना का विस्तृत विवरण दिया। आरोप है कि 31 दिसंबर 2025 की रात करीब 1:22 बजे प्रतापगढ़ थाना प्रभारी दीपक बंजारा, कॉन्स्टेबल राजवीर, रमेश उर्फ गजनी सहित अन्य पुलिसकर्मी और कथित “फर्जी पुलिस” बनकर आए सिविल व्यक्ति हथियारों के साथ उनके घर में घुस गए। उन्होंने दरवाजा तोड़कर अनाधिकृत प्रवेश किया और घर में सो रहे लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे अब्दुल हमीद के हाथ-पैर टूट गए। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर तोड़े गए, खून के निशान साफ कर सबूत नष्ट किए गए। इसके अतिरिक्त, घर से लगभग 6-7 तोला सोना, 1.80 लाख रुपए नकद, मोबाइल फोन, एलईडी टीवी और अन्य सामान लूट लिया गया। ज्ञापन में गंभीर आरोप भी लगाया गया कि पुलिस ने बाद में अब्दुल हमीद को एनडीपीएस के एक पुराने मामले में फर्जी पूछताछ नोट तैयार कर झूठे केस में फंसाया। परिवार ने कॉल डिटेल, लोकेशन, वीडियो फुटेज और पेन ड्राइव को सबूत के तौर पर सौंपने का दावा किया है। परिजनों का कहना है कि यदि अब्दुल हमीद वांछित होते, तो उनकी तलाश पहले ही दर्ज होती, जबकि वे खुलेआम अपने घर और शहर में आते-जाते रहे हैं। इस दौरान अंजुमन के सदर खानशेद खान, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष दीर्घविजय सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे।


