पूर्व मुख्यमंत्री ने अशोक गहलोत के दौरे पर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बजट में जोधपुर और मारवाड़ की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कहा स्थानीय चुनावों कांग्रेस की जीत का दावा भी किया। वहीं उदयपुर फाइल्स को लेकर पूछे गए सवाल को वो टाल गए। गहलोत ने कहा- पंचायत चुनाव होने ही हैं, स्थानीय निकायों के पंचायत चुनाव भी होने ही हैं और कांग्रेस कामयाब होगी। समय पर चुनाव होना आवश्यक था। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार कह चुके हैं कि चुनाव समय पर कराए जाएं। संवैधानिक संशोधन के बाद समय पर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, लेकिन इन्हें बिना वजह लंबा खींचा जा रहा था। अब कोर्ट के आदेश के बाद मुझे उम्मीद है कि चुनाव कराना पड़ेगा। बजट में मारवाड़ की उपेक्षा उन्होंने कहा- यह है कि जो बजट आया, उसमें जोधपुर और पूरे मारवाड़ की उपेक्षा हुई है। मारवाड़ की स्थिति अलग है-जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जालौर, सिरोही और पाली-इन क्षेत्रों में अकाल और सूखे की स्थिति रही है। कई ऐसी योजनाएं थीं जिन्हें हाथ में लिया जाना चाहिए था। हमने राजीव गांधी लिफ्ट योजना के थर्ड फेज पर राज्य सरकार के खर्च से लगभग चौदह सौ करोड़ रुपये लगाए। काम शुरू हुआ, लेकिन धीमा पड़ गया। यदि मैं केंद्र सरकार के भरोसे रहता कि तुरंत फंडिंग आएगी, तब शुरू करेंगे, तो आज तक वह काम शुरू भी नहीं हो पाता। पूरे जोधपुर जिले के गांवों और आसपास के इलाकों में पीने का पानी पहुंचाना है, लेकिन उपेक्षा की जा रही है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट बना पर बंद पड़ा गहलोत ने कहा- जो काम पूरे हो चुके हैं,अस्सी करोड़ रुपये का स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट बना हुआ है, पर बंद पड़ा है और खिलाड़ियों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी शानदार भवन बनने के बावजूद बंद पड़ी है। दिगाड़ी, प्रतापनगर, चैनपुरा और मगरा पूंजला में अच्छी इमारतें बन गई हैं, लेकिन अस्पतालों में न डॉक्टर लगाए गए हैं, न उपकरण पहुंचे हैं। सरकार को इतना उपेक्षापूर्ण रवैया नहीं रखना चाहिए था। फिनटेक यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग का काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है। इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद जोधपुर की उपेक्षा क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है। रिफाइनरी के उद्घाटन की बढ़ा रहे तारीख रिफाइनरी को लेकर बार-बार झांसा दिया जा रहा है। अगस्त में उद्घाटन की बात कही गई थी, फिर क्यों नहीं हुआ? गृह मंत्री कई बार जोधपुर आ चुके हैं। यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, सुमेर लाइब्रेरी है-जो काम अधूरे पड़े हैं, उनका ही उद्घाटन करवा देते। रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री से क्यों नहीं करवा रहे? बार-बार तारीख बदल रहे हैं। आखिर राज क्या है? इस बजट ने राजस्थानवासियों को पूरी तरह निराश किया है। ऐसा निराशाजनक बजट पहले कभी नहीं आया। पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश है, हर क्षेत्र में असंतोष है। पेमेंट बकाया है। विभागों के काम नहीं हो रहे बुजुर्ग पेंशन हो, बच्चों की स्कॉलरशिप हो, छात्रों की स्कूटी हो-तमाम विभागों के बजट लंबित पड़े हैं। पीएचईडी हो, इरिगेशन हो, पीडब्ल्यूडी हो-कहीं काम नहीं हो रहे। भुगतान नहीं हो रहा और कहा जा रहा है कि रेवेन्यू बहुत बढ़ गया है। रेवेन्यू तो हर साल बढ़ता है, लेकिन वह बढ़कर जा कहां रहा है? भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा? ठेके के सारे काम बंद पड़े हैं। ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। समझ में नहीं आता कि ये लोग क्या कर रहे हैं। राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा के सवाल का जबाब देते हुए उन्होंने कहा-: यदि सरकार का एजेंडा यही है, और केंद्र सरकार व यूपी सरकार का भी यही एजेंडा है, तो फिर हिंसा होगी ही होगी। फ्रीबीज़ और चुनाव से पहले कैश ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के सवाल पर गहलोत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की मंशा कुछ और थी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय आप पैसा बांटते हैं, जैसे बिहार में हुआ। परसों पोलिंग है और आज दस-दस हजार रुपये बांटे जा रहे हैं। हर फेज में पैसा बंटता रहा और इलेक्शन कमीशन ने रोक नहीं लगाई। कल्पना कीजिए, तमिलनाडु में एक बार वोटरों को कुछ कपड़े दिए गए थे। उस समय टी.एन. शेषन चुनाव आयुक्त थे। उन्होंने चुनाव से तीन दिन पहले मतदान स्थगित कर दिया था। लेकिन बिहार में पैसा बंटता रहा और सब चुप रहे। ऐसे में लोकतंत्र कैसे कायम रहेगा? यह लोकतंत्र की हत्या है। एआई में हम पीछे न रहें एआई समिट के सवाल पर बोले- एआई बहुत महत्वपूर्ण है। राजस्थानवासियों को उसमें पूरा रुचि लेनी चाहिए। यह पूरी दुनिया में एक क्रांति है। हम पीछे न रहें, यह हम सबका प्रयास होना चाहिए-युवा पीढ़ी का भी और सभी वर्गों का। किसान हो, मजदूर हो, उद्योग हो, मेडिकल व स्वास्थ्य क्षेत्र हो या शिक्षा-हर क्षेत्र में यह चमत्कार साबित हो सकता है। मैं स्वयं इसका बहुत उपयोग करता हूं और अपने हर काम में इसे शामिल करता हूं।


