पौधे लगाने के 9 महीने बाद भुगतान नहीं:नर्मदापुरम में किसान परेशान, राज्य बांस मिशन योजना के तहत डेढ़ लाख पौधे लगाए

नर्मदापुरम जिले में राज्य बांस मिशन योजना के तहत 9 माह पहले लगाएं बांस के पौधों की अनुदान राशि का भुगतान अबतक नहीं हो पाया है। जिले के सैकड़ों किसान अनुदान राशि की पहली और दूसरी किस्त के लिए परेशान हो रहे है। मंगलवार को सिवनी मालवा तहसील क्षेत्र के 40से ज्यादा हितग्राही किसान, जिन्होंने योजना के तहत बांस के पौधे अप्रैल 2025 में लगाएं। उसकी राशि के भुगतान के लिए डीएफओ और सीसीएफ कार्यालय नर्मदापुरम पहुंचे। डीएफओ गौरव शर्मा से मिलकर उन्होंने अपनी समस्या बताई और राशि के भुगतान का निवेदन किया। डीएफओ ने जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया। लेकिन किसान उसे संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि राशि का भुगतान कराने में देरी क्यों। ग्राम खल के किसान प्रवीण रघुवंशी ने बताया अप्रैल 2025 में राज्य बांस मिशन योजना के अंतर्गत हम सभी किसानों द्वारा अपनी निजी भूमि में बांस पौधों का रोपण किया गया। रोपण के बाद बांस पौधों की जीवितता के आधार पर वन विभाग के द्वारा बांस मिशन की गाइडलाइन अनुसार बांस पौधों का सत्यापन करवाया जाता है, और इसी सत्यापन में प्राप्त जीवितता के आधार पर हम कृषकों को अनुदान मिलता है। राज्य बांस मिशन योजना में प्राप्त होने वाले अनुदान से ही हमारे द्वारा बांस पौधों का रखरखाव, निदाई गुड़ाई, खाद, दवाई, मृत पौधे बदलना, मजदूरी का भुगतान आदि खर्च किए जाते हैं। लेकिन समय पर अनुदान प्राप्त नहीं होने पर पर हमारे द्वारा उक्त कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे हमारे पौधे मर जाते है या रोगग्रस्त होकर सूख जाते है, जो हमारे आर्थिक नुक़सान को बढ़ा देता। बांस निशन योजना मप्र वर्ष 2025 की गाइडलाइन अनुसार प्रथम किस्त 60/- रुपए प्रति पौधा माह अगस्त सितम्बर और द्वितीय किस्त 30/- रुपए प्रति पौधे के हिसाब से नवंबर-दिसम्बर में भुगतान होना चाहिए था। लेकिन अब तक प्रथम और द्वितीय किस्त का भुगतान नहीं हो पाया है। विभाग द्वारा सत्यापन भी समय पर नहीं किया जाता। अगर सत्यापन हो भी जाता है तो भुगतान 6 से 8 माह बाद भी नहीं हो पाता है। डेढ़ लाख पौधे लगाएं, 90 लाख होना है भुगतान डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया योजना के तहत करीब डेढ़ लाख पौधे लगाएं थे। जिसका करीब 90लाख भुगतान होना है। हमारे पास 30लाख का बजट हैं। दो तीन दिनों में कुछ राशि का भुगतान हम करवा रहे है। बाकी का राशि का भुगतान बजट आते ही करेंगे।

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