प्रतापगढ़ में निजी बस संचालकों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। जिले में लगभग 130 निजी बसें सड़कों से नदारद रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस संचालक परिवहन विभाग की कार्रवाई के विरोध में जिला मुख्यालय पर डटे हुए हैं। हड़ताल का नेतृत्व जिलाध्यक्ष शाकिर खान कर रहे हैं। बस संचालकों ने एक ज्ञापन सौंपकर विभाग द्वारा की जा रही कथित अनैतिक कार्रवाइयों का विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप है कि इन कार्रवाइयों से बस मालिक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। उनकी मुख्य मांग है कि वर्तमान में लागू किए जा रहे बस बॉडी कोड (152, 153, 119) को 31 मार्च 2026 के बाद बनने वाली नई बसों पर ही लागू किया जाए। पुरानी बसों को पहले की तरह चलने की अनुमति दी जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जब तक राजस्थान के सभी जिलों में फिटनेस सेंटर स्थापित नहीं हो जाते, तब तक फिटनेस जांच स्थानीय परिवहन विभाग द्वारा ही की जानी चाहिए। संचालकों ने प्रतापगढ़ में एक फिटनेस सेंटर शुरू करने की भी मांग की, ताकि वाहन मालिकों को अन्य जिलों में जाकर जांच करवाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। इसके अलावा, स्टेज कैरिज बसों पर लगे लगेज कैरियर को न हटाने और परमिट की ऑनलाइन-ऑफलाइन सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। संचालकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था परमिट बनवाने में कठिनाई पैदा कर रही है। हड़ताल के कारण आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्री बसों के इंतजार में खड़े देखे गए, जबकि कुछ को निजी वाहनों या थ्री-व्हीलर टेम्पो का सहारा लेना पड़ा। रोडवेज बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने से स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। बस संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आह्वान पर आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों को विशेष रूप से परेशानी हो रही है।


