प्रतापगढ़ नगर परिषद में कथित अनियमितताओं और अवैध कार्यों की जांच के बीच पूर्व सभापति कौशल्या देवी ने आरोपों से खुद को अलग रखा है। जिला कलेक्टर को भेजे गए पत्र में कौशल्या देवी ने स्पष्ट किया कि उनके नाम और हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर कई दस्तावेज जारी किए गए हैं, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। पत्र में उल्लेख है कि नगर परिषद प्रतापगढ़ में धारा 69 ए के तहत जारी पट्टों, भूमि आवंटन, भू-रूपांतरण और भवन निर्माण से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्रों की शिकायतों की जांच चल रही है। हस्ताक्षरों को अवैध और फर्जी बताया
पूर्व सभापति ने बताया कि इन मामलों में कुछ पत्रावलियों पर उनके हस्ताक्षर अंकित पाए गए हैं, जबकि उस अवधि में वे सभापति के पद पर कार्यरत नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कार्यकाल 6 अप्रैल 2022 से 26 अप्रैल 2022 तक मात्र 21 दिनों का था। इसके बावजूद कई दस्तावेजों पर उनके नाम से हस्ताक्षर कर फाइलों का निस्तारण किया गया, जो पूरी तरह फर्जी और अवैध है। आमजन की शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने फर्जी पट्टों के मामले को गंभीरता से लिया। राजस्व विभाग की टीम से जांच करवाने पर मामले की हकीकत सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पहले 31 पट्टों पर कार्रवाई शुरू की। दूसरे चरण में 10 और पट्टे सामने आने के बाद उन पर भी कार्रवाई की गई। प्रशासन अब तक 40 से अधिक पट्टों पर कार्रवाई कर चुका है।


