कवर्धा| जिले के ग्रामीण अंचल में इन दिनों प्रतिबंध के बाद भी खेत में पराली व गन्ने के छिलके जलाए जा रहे हैं। ऐसे ज्यादातर मामले ग्राम जोराताल से लेकर रबेली, प्रतापपुर होकर कुंडा मार्ग में देखे जा सकते हैं। शाम के समय किसान अपने खेत में गन्ने के छिलके को जला रहे हैं। पराली जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता घटती है। इससे मिट्टी के पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व सल्फर नष्ट हो जाते हैं। पराली जलने से धुआं व धूल से सास की बीमारियां, आखों में जलन व हृदय रोग बढ़ाता हैं। हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिससे धुआं छा जाता है। पराली जलाना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना व कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, कबीरधाम जिले में अभी तक ऐसा कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


