प्रदेश की मिट्टी में लौटी उर्वरता…:यूरिया की 2.82% खपत घटी 11 साल में पहली बार आर्गेनिक कार्बन 0.53 फीसदी तक पहुंचा

पीएम-प्रणाम (प्रोग्राम फॉर रेस्ट्रोरेशन, अवेयरनेस, नरिशमेंट एंड अमेलियोरेशन ऑफ मदर अर्थ) योजना के प्रभाव से पंजाब में कैमिकल खाद-यूरिया की खपत में कमी दर्ज की गई है। राज्य ने 3 साल के औसत की तुलना में उर्वरक खपत में 2.82% (1,11,903 मीट्रिक टन) की कमी हासिल की है। कृषि विभाग पंजाब ने एनजीटी में दायर हलफनामे में खुलासा किया है। एनजीटी में खादों के प्रयोग और मिट्टी में जैविक कार्बन (एसओसी) के मुद्दे पर सुनवाई हो रही है। डायरेक्टर एग्रीकल्चर गुरजीत सिंह बराड़ ने राज्य में उर्वरक उपयोग, मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाए गए कदमों का विवरण देकर कमी के बारे में बताया है। बराड़ ने कहा कि 2024-25 में यूरिया की खपत में 4.97% और डीएपी में 12.49% की कमी आई है। हालांकि एमओपी और एनपीके उर्वरकों की खपत में क्रमशः 1.75 और 77.61% की वृद्धि दर्ज की गई। विभाग का कहना है कि एनपीके अनुपात को संतुलित करने के प्रयासों के कारण यह बदलाव देखने को मिला है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग की धारणा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। राज्य में फसल तीव्रता लगभग 189% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। गेहूं की उत्पादकता 5 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक और धान की 6-7 टन प्रति हेक्टेयर के आसपास है, जो देश में टॉप पर है। विभाग ने गडवासू लुधियाना के आंकड़ों का हवाला देकर बताया कि 1980 के दशक में औसत सॉयल आर्गेनिक कार्बन 0.33% था, जो 2011-23 के दौरान बढ़कर 0.53% हो गया है। हाई आर्गेनिक कार्बन श्रेणी में आने वाली मिट्टी के नमूनों का प्रतिशत बढ़ा है। रही हैं। इसके अलावा जैविक खेती और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। एमओपी और एनपीके के उपयोग में वृद्धि हुई है, जो संतुलित उर्वरक उपयोग की ओर संकेत करता है। हलफनामे में उल्लेख किया गया कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत अब तक 30 लाख कार्ड जारी किए गए हैं। किसानों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, आयरन और जैविक कार्बन आधार पर फसलवार सिफारिशें दी जा साल यूरिया डीएपी एमओपी एनपीके कुल 2021-22 31,51,199 5,65,746 56,606 1,35,940 38,89,491 2022-23 31,28,887 8,03,048 50,028 42,054 40,24,017 2023-24 32,07,092 7,10,132 52,251 87,999 40,10,474

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