मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बुधवार को पेश किए गए वित्तीय वर्ष के बजट को लेकर बालाघाट में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां भाजपा इसे स्वर्णिम भविष्य का आधार बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया है। विपक्ष ने बजट को बताया ‘सपनों का मायाजाल’ कांग्रेस विधायक और जिलाध्यक्ष संजय उईके ने सरकार को घेरते हुए कहा कि केवल बजट का आकार बढ़ाने से जनता का भला नहीं होने वाला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और वित्तीय स्थिति चिंताजनक है। उईके के अनुसार, युवाओं के लिए रोजगार का कोई स्पष्ट रोडमैप इस बजट में नजर नहीं आता। वहीं, विधायक अनुभा मुंजारे ने इसे ‘सपनों का बजट’ करार देते हुए कहा कि मध्यम वर्ग और महिलाओं को महंगी रसोई से कोई राहत नहीं दी गई है। पूर्व नपा उपाध्यक्ष अनिल सोनी ने भी इसे पुरानी अधूरी घोषणाओं का विस्तार बताते हुए ‘झूठ का पुलिंदा’ कहा। सत्ता पक्ष ने किया चहुंमुखी विकास का दावा दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने बजट का जोरदार स्वागत किया है। पूर्व नपाध्यक्ष अनिल धुवारे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने समाज के हर वर्ग, चाहे वह किसान हो, युवा हो या महिला, सभी की जरूरतों का इस बजट में विशेष ध्यान रखा है। विशेषज्ञ बोले- इस बजट में संतुलन और स्थिरता आर्थिक विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने इस बजट को संतुलित दृष्टिकोण वाला बताया है। सीए बलजीतसिंघ छाबड़ा ने विश्लेषण करते हुए कहा कि सरकार ने विकास की रफ्तार और वित्तीय अनुशासन के बीच सामंजस्य बिठाने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने आयकर प्रक्रियाओं के सरलीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ाए गए पूंजीगत व्यय की सराहना की। छाबड़ा के अनुसार, यह बजट केवल तात्कालिक राहत देने वाला नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण का एक सशक्त रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिससे करदाताओं में विश्वास बढ़ेगा।


