राज्य सरकार की ‘सशक्त किसान-समृद्ध राजस्थान’ संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से प्रभारी सचिव डीग एवं संभागीय आयुक्त भरतपुर नलिनी कठोतिया ने गुरुवार को ग्राम पंचायत निगोही एवं ऊदाका में आयोजित ग्राम उत्थान शिविरों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जमीनी हकीकत परखी। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकारियों को जनसेवा के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी रहने के निर्देश दिए। कठोतिया ने शिविर स्थल पर स्थापित सभी 12 विभागों के स्टॉलों का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक विभाग के काउंटर पर जाकर पंजीयन की स्थिति, लंबित आवेदनों के निस्तारण की प्रक्रिया और आमजन को दी जा रही जानकारी की विस्तृत समीक्षा की। संभागीय आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन शिविरों की सार्थकता तभी है, जब पात्र व्यक्ति को भटकना नहीं पड़े और उसे एक ही छत के नीचे त्वरित समाधान प्राप्त हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता अक्षम्य होगी। कृषि प्रधान क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कठोतिया ने ग्राम पंचायत ऊदाका में कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए। उन्होंने उपस्थित कृषकों को वैज्ञानिक कृषि पद्धति अपनाने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि मृदा परीक्षण के उपरांत संतुलित उर्वरक उपयोग से लागत में कमी आएगी और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। इस अवसर पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामकुंवार जाट ने प्रभारी सचिव को विभाग द्वारा प्रदत्त विभिन्न अनुदानों एवं तकनीकी नवाचारों से अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान राज्य सरकार की तारबंदी योजना के दूरगामी परिणामों पर भी चर्चा हुई। ग्राम बाबेन के प्रगतिशील कृषक जगदीश का उदाहरण देते हुए प्रभारी सचिव ने बताया कि किस प्रकार 48 हजार के सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर उन्होंने अपने खेत की सुरक्षा सुनिश्चित की है। इस योजना के माध्यम से जंगली जानवरों व आवारा पशुओं से होने वाली फसल क्षति पर प्रभावी अंकुश लगा है, जो अन्य कृषकों के लिए एक प्रेरक दृष्टांत है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जुड़ने का आह्वान किया ताकि उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
इस निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान उपखंड मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, सहायक कृषि अधिकारी देवकांत ओझा, कृषि पर्यवेक्षक अनिल मेघवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कठोतिया ने अंत में समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर के उपरांत भी पात्र व्यक्तियों के प्रकरणों का अनुवर्तन किया जाए ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके।


