हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति के लिए दस्तावेज सत्यापन से वंचित अभ्यर्थियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में झारखंड सरकार और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ और खंडपीठ ने प्रार्थियों को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे प्रार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि विज्ञापन संख्या 21/2016 के अनुसार एक बार वेरिफिकेशन में छूट जाने पर दोबारा मौका देने का प्रावधान नहीं है। सभी जानकारियां आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध थीं। प्रार्थी निर्मल पाहन एवं अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता देवदत्त कामत व अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलील दी कि कई सफल अभ्यर्थियों को एसएमएस, ईमेल और डाक से सूचना दी गई, जबकि कुछ को यह सुविधा नहीं मिली, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट में प्रार्थियों का तर्क…आयोग ने सूचना नहीं दी निर्मल पाहन एवं अन्य की अपील में अधिवक्ता की ओर से हाइकोर्ट को बताया था कि वे सुदूर क्षेत्र में रहते हैं। मेरिट लिस्ट के संबंध में आयोग से सूचना नहीं मिल सकी। चयनित होने के बाद भी वे प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए समय पर उपलब्ध नहीं हो सके। यह उनके अधिकार का हनन है।


