विश्व प्रसिद्ध केवलादेव पक्षी विहार वेटलैंड जिसे पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है इन दिनों प्रदूषण की मार झेल रहा है। वेटलैंड क्षेत्र में जाटौली घना से निकलने वाला गंदा नाले का पानी और कूड़ा लगातार पहुंच रहा है, जिससे पर्यावरण व प्रवासी पक्षियों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है। जाटौली घना के ताल, सीवरेज व बारिश का गंदा पानी सीधे वेटलैंड की ओर मोड़ दिया गया है। इसके साथ ही प्लास्टिक व घरेलू कचरा भी खुले में फेंका जा रहा है, जो धीरे-धीरे जल क्षेत्र में पहुंच रहा है। इससे पक्षियों के लिए आवश्यक प्राकृतिक भोजन व आवास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। केवलादेव पक्षी विहार में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने व दलदल बनाए रखने के लिए हर बार पांचना डेम से पानी छोड़ा जाता है। वहीं, पक्षियों के स्वास्थ्य को देखते हुए गोवर्धन डेम से पानी लिया गया क्योंकि रिसर्च में सामने आया था कि गोवर्धन नाले का पानी पक्षियों और जलीय जीवों के लिए हानिकारक है। ऐसे में जाटौली घना का सीवरेज का पानी नेशनल पार्क में लाना बंद कर दिया गया। “जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के आवास के लिए बढ़ते खतरे को देखते हुए। नगर निगम को पत्र के माध्यम से कार्यवाही के लिए कहेंगे।”
-चेतन वीवी, डीएफओ, वाइल्ड लाइफ


