जबरन पेनल्टी और टैक्स वसूली के विरोध में निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल के बीच जयपुर के दुर्गापुरा क्षेत्र में दो संगठनों का विवाद खुलकर सामने आ गया। विरोध के दौरान उप नगरिया रूट और स्टेट कैरिज बस ऑपरेटर्स आमने-सामने आ गए। आरोप है कि विरोध कर रही यूनियन के सदस्यों ने यात्रियों से भरी बस को जबरन खाली करा दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आम यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ी। राजस्थान के व्यस्त जयपुर-बीकानेर रूट पर निजी बस ऑपरेटर्स और परिवहन विभाग के बीच टकराव पहले से जारी है। ऑपरेटर्स ने आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र चौधरी और इंस्पेक्टर राजेश चौधरी को एपीओ करने की शर्त पर ही वार्ता आगे बढ़ाने की बात कही है। कोटा और भरतपुर रूट के संचालकों ने इस आंदोलन से दूरी बनाई है। जयपुर-बीकानेर रूट पर करीब 3450 बसों को परमिट जारी हैं। यही मार्ग खाटू नगरी तक जाने वाले श्रद्धालुओं का मुख्य रास्ता है। लख्की मेले के दौरान बसों की सीमित उपलब्धता के कारण यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बस स्टैंडों पर भीड़ बढ़ी और कई जगह यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद बसें मिलीं। यात्री ‘सफर’ में हैं; गोकुल का परिवार 4 घंटे इंतजार करता रहा, सीट नहीं मिली, भूख-प्यास में खड़े-खड़े किया सफर प्राइवेट बसों की हड़ताल के बीच सिंधी कैंप बस स्टैंड पर अव्यवस्था चरम पर रही। भीड़ बढ़ती रही, लेकिन न अतिरिक्त काउंटर खुले, न प्लेटफॉर्म की घोषणा हुई। बसों के नंबर और प्लेटफॉर्म की जानकारी नहीं मिलने से यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी रही। कोई पूछने वाला नहीं, कोई दिशा बताने वाला नहीं। भीड़ को संभालने के लिए पुलिस जाब्ता लगाना पड़ा, लेकिन व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ सकीं। दोपहर 11 बजे आए, 3:30 बजे बस मिली


