प्राकृतिक गुलाल से आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं:पलाश-नीम के अर्क से तैयार किया जा रहा गुलाल, त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित

सलूंबर जिले के सराडा क्षेत्र के नठारा आदिवासी बहुल गांव में प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत महिलाओं ने प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार किया है। इसमें पलाश के फूल, पालक, रिझगा, नीम की हरी और सूखी पत्तियां और मंदिरों में चढ़े फूलों का पुनर्चक्रण शामिल है। विभिन्न सब्जियों के अर्क से भी रंग तैयार किए जा रहे हैं। त्वचा और पर्यावरण के अनुकूल यह गुलाल पूरी तरह रसायनमुक्त है, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है। इस पहल से महिलाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। पहले वे केवल मौसमी मजदूरी पर निर्भर थीं, लेकिन अब घर के पास ही उत्पादन कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। विशेषज्ञों द्वारा उन्हें गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे उनके कौशल में निखार आया है। जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय बाजारों और मेलों में स्टॉल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे इन उत्पादों को बेहतर बाजार मिल रहा है। प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाना और महिलाओं को स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराना है।

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