ये सभी सेवानिवृत्त लेखा अधिकारी उसी प्रारंभिक-माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में तय राशि में तैनात किए गए हैं, जहां पहले से सरकार ने 30 लेखा विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों की फौज तैनात की है। ये वही विभाग हैं, जहां करीब 41,178 स्कूल, 83,783 कक्षाएं और 16,765 शौचालय जर्जर स्थिति में हैं। 20 हजार करोड़ रुपए का बजट चाहिए, मगर सरकार के पास बजट नहीं है। बीते बजट में सिर्फ 500 करोड़ रुपए ही दिए गए। उसी निदेशालय में लेखा शाखाओं में 30 नियमित कार्मिक लगे होने के बाद भी सिर्फ सलाह लेने-देने के लिए 3 लाख 15 हजार 700 रुपए प्रति माह ऐसे अधिकारियों को दिए जा रहे हैं, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। हैरानी की बात ये है कि निदेशालय में ही इन सेवानिवृत्त लेखाधिकारियों के समकक्ष कार्मिक हैं, फिर भी सिर्फ सलाह लेने के लिए ये आदेश जारी किए गए। निदेशालय से लेकर जयपुर सचिवालय तक ये बात चर्चा में है कि आखिर शिक्षा विभाग ऐसा क्या काम करता है, जिसके लिए उसे इतने सलाहकारों की जरूरत है। इन लेखाधिकारियों की ताकत ऐसी कि इनके सामने यहां नियमित काम करने वाले उनके समकक्ष अधिकारी खुद को बौना समझते हैं, क्योंकि सेवानिवृत्त के बाद उनका वापस सलाहकार बनना उनका रसूख बढ़ा रहा है और उसी रसूख के आगे सारे नतमस्तक भी हो गए हैं। नियम कहते हैं कि सेवानिवृत्त कार्मिकों को पुनर्नियुक्ति देने पर आमतौर पर “अंतिम आहरित मूल वेतन में से मूल पेंशन को घटाकर” शेष राशि का भुगतान किया जाता है। कुछ मामलों में यह अंतिम मूल वेतन का लगभग 40% या समेकित पारिश्रमिक के रूप में भी निर्धारित किया जा सकता है। इन नियुक्त किए गए ज्यादातर लोगों को मूल वेतन के 50 प्रतिशत से ज्यादा राशि मिल रही है। ये हैं चार सलाहकार… ऐसे हुई इनकी नियुक्ति ओम कुमार थानवी : 2 सितंबर 2024 को आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 23-8-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद थानवी, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 67,500 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 90,000 रुपए था। नूतन कुमार हर्ष : 2 सितंबर 2024 को आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 23-8-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद हर्ष, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 63,700 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 84,900 रुपए था। सुरेन्द्र कुमार पुरोहित : एक ओर आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 5-9-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद पुरोहित, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 56,600 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 75,400 रुपए था। संजय धवन : एक अलग से आदेश जारी किया कि 14-10-2025 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 14-11-2025 पर सहमति प्राप्त होने के उपरांत संजय धवन, सेवानिवृत्त वित्तीय सलाहकार, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक सलाहकार के रूप में 1,26,900 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 1 लाख 60 हजार 600 रुपए था। भास्कर इनसाइट- मंत्री-सचिव के बीच सब कुछ ठीक नहीं शिक्षा विभाग में ये चर्चा अब आम हो गई है कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सचिव कृष्ण कुणाल के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। इसके उदाहरण के रूप में लोग तर्क दे रहे हैं कि प्रिंसिपल और लेक्चरर ट्रांसफर सूची मंत्री के यहां से सीएमओ पहुंचने के बाद भी दो-दो महीने तक सूची अटकी रही। खबरनवीस बताते हैं कि 14 साल पहले जब कुणाल भरतपुर कलेक्टर थे, तब से भजनलाल शर्मा से उनके रिश्ते मजबूत हो गए थे। कहा जाता है कि हर ट्रांसफर सूची में जैसा मंत्री चाहते हैं, वह होने नहीं दिया जा रहा, क्योंकि सचिव को सीएमओ से ताकत मिली है। वही स्थिति अब संशोधन सूची में भी बन रही है। मंत्री के पास आरएसएस का दबाव है कि उनके कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई, इसलिए संशोधन सूची निकाली जाए, मगर सचिव इसके पक्ष में नहीं हैं। मंत्री-सचिव के बीच सब कुछ ठीक न होने का असर डायरेक्टरेट पर भी हो रहा है। मंत्री के आदेश यहां नहीं माने जा रहे। “ये मामला गंभीर है। मैंने पहले भी इस संबंध में आदेश दिए थे। चलिए, मैं इनकी रिपोर्ट मंगाता हूं और जल्दी ही कोई निर्णय करूंगा।”
-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री निदेशालय ने मंत्री के आदेश भी नहीं माने 11 जुलाई 2025 को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को एक कर्मचारी संगठन की ओर से निदेशालय से जुड़ी कुछ शिकायतें की गई थीं, जिनमें हितकारी निधि समेत अन्य पदों पर लगे शैक्षिक स्टाफ को हटाकर मंत्रालय स्टाफ को लगाने जैसे मामले सामने थे। हालांकि इस शिकायत से पहले ही मंत्री मदन दिलावर ने खुद के हस्ताक्षर से 6 फरवरी 2024 को एक पत्र निदेशक माध्यमिक शिक्षा को भेजा था और कहा था कि माध्यमिक शिक्षा में नियुक्त अनुभाग में 10 अध्यापक तथा पंजीयक शिक्षा विभागीय कार्यालय में 10 अध्यापक प्रतिनियुक्ति पर हैं। इन्हें तत्काल हटाया जाए। हितकारी निधि में 16 कार्मिक कार्य कर रहे हैं, जबकि 6 की भी जरूरत नहीं है। 3 तो 65 साल से ऊपर के काम कर रहे हैं और हितकारी निधि से पैसा उठा रहे हैं। इसमें मंत्री ने 3 कार्मिकों के नाम भी हटाने के लिए दिए थे, मगर उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। इससे लगता है कि निदेशालय मंत्री की पहुंच से दूर है और यहां निदेशक की मनमर्जी चलती है। पांच साल से ऊपर वाले भी डायरेक्टरेट में डटे पिछले साल मंत्री मदन दिलावर बीकानेर आए थे। डायरेक्टरेट में मीटिंग ली और बाद में बयान दिया कि पांच साल से ऊपर का कोई कर्मचारी डायरेक्टरेट में नहीं रहेगा, मगर हैरानी हुई कि मंत्री के इतना कहने के बाद भी कोई नहीं हटा। मौजूदा स्टाफ में करीब 80 प्रतिशत स्टाफ ऐसा है, जो 5 साल से ऊपर का है। कुछ तो ऐसे हैं, जो पूरी नौकरी ही डायरेक्टरेट में करने वाले हैं। इससे साफ है कि मंत्री की डायरेक्टरेट में कम सुनी जा रही है, क्योंकि कुछ लोगों के सीधे तार जयपुर सचिवालय से जुड़े हैं।


