प्रिंसिपल बोली- कलेक्टर को बुला ले, साइन नहीं करूंगी:विधायकजी ने दिखाया ‘बनारसी अवतार’; शाहरुख पर बवाल, सलमान की डिमांड

नमस्कार राजस्थान विधानसभा के अंदर शाहरूख खान पर हंगामा और बाहर सलमान खान की डिमांड हो गई। बूंदी में सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल ने साइन करने का रेट फिक्स कर दिया। सिरोही में बजरी का ऐसा डंपर पकड़ा गया जिसमें असली ‘खजाना’ नीचे छुपा था और बगरू विधायक ‘बनारसी अवतार’ में खूब जंच रहे हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. शाहरुख खान को 100 करोड़ किस बात के दे दिए? आज से करीब 30 साल पहले शाहरुख खान और सलमान खान एक साथ राजस्थान आए थे। तब करण-अर्जुन की जोड़ी ने खूब धमाल मचाया था। अब शाहरुख खान के पेमेंट को लेकर विधानसभा में हंगामा हो गया। बात आईफा में किंग खान को 100 करोड़ का पेमेंट करने की थी। कांग्रेस विधायक खान साहब बोले- शाहरुख खान को 100 करोड़ किस बात के दे दिए? गरीबों की कमाई का पैसा था। किस बात के लिए आईफा ऑर्गेनाइज किया? राजस्थान के आम आदमी की खून-पसीने की कमाई है, क्यों दे दिए? हमको जनता ने जिम्मेदारी दी है आपसे ये सवाल पूछने की। हम पूछते हैं क्यों दिए सौ करोड़? माननीय ने आवाज की पिच बढ़ाकर गले की नसें खड़ी कर लीं, लेकिन जवाब नहीं मिला। अब सलमान खान को इनवाइट करने की तैयारी चल रही है। नहीं-नहीं। किसी स्टेज प्रोग्राम के लिए नहीं। बल्कि एक स्कूली बच्चे की ख्वाहिश है। वह सलमान खान से मिलना चाहता है। अपनी इच्छा उसने डिप्टी सीएम साहिबा के सामने जाहिर की। डिप्टी सीएम ने भी बच्चे को उम्मीद बंधाई। कहा- हम कोशिश करेंगे। सलमान खान को मैसेज भेजेंगे कि आपसे आकर मिलें। 2. प्रिंसिपल साहिबा ‘डोनेशन’ लेकर ही साइन करेंगी फरवरी का महीना है। फाल्गुनी बयार चल रही है। धूप सुहा रही है। सरकारी स्कूल के बरामदे में टेबल सजी है। टेबल पर एक एप्लीकेशन गोल होकर पड़ी है। एप्लीकेशन से कुछ इंच की दूरी पर प्रिंसिपल की सील पड़ी है। लेकिन सील ऐंठी हुई है। उसे बिना ‘डोनेशन’ के किसी भी ऐरे-गैरे कागज पर अपनी छाप नहीं छोड़नी। सील एप्लिकेशन को तर्क देती है- देख यार, तेरा कागज चल निकला तो स्कॉलरशिप तुझी को मिलेगी, पैसा आएगा। मुझे क्या मिलेगा? इसलिए डोनेशन देनी पड़ेगी। मैं कौन सा मेरे लिए मांग रही हूं, ये तो स्कूल को जाएगा। एप्लिकेशन फड़फड़ाती है- मैं गरीब हूं। सरकारी स्कूल के छात्र का प्रार्थना पत्र हूं। मैं कहीं कमाने नहीं जाता। परसेंटेज लाकर क्वालीफाई किया है, तब स्कॉलरशिप का हक मिला है, मुहर तो लगानी पड़ेगी। सील तुनकी- अच्छा बेटा? मुझ पर धौंस। हमें भी विद्यालय के हित में काम करना है। डोनेशन दे और मुहर लगवा। एप्लिकेशन ने आंखें दिखाई- क्या अब यहां भी रिश्वतखोरी चलेगी? सील ने हैरानी जताई- ये रिश्वत है क्या पगले? एप्लिकेशन ने हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाई लेकिन तब तक सील का पारा हाई हो चुका था- जा बेटा, अब तो मुहर नहीं लगेगी, अब तू कलेक्टर-एसडीएम को ही क्यों न बुला ले। मुहर बिल्कुल नहीं लगेगी। सील ने नखरा तो दिखा दिया, लेकिन उसे पता नहीं था कि एप्लीकेशन के साथ उसका दोस्त मोबाइल कैमरा भी उसे घूर रहा है। अब बड़ी वाली सील जांच के आदेश वाले कागज पर छप चुकी है। 3. पांच सौ के लालच में न आ जाना भैया नशे की तस्करी के मास्टरमाइंड ने अपने सभी गुर्गों को इकट्‌ठा किया। सभी कॉन्फ्रेंस हॉल में जुट गए। इसके बाद बॉस ने रिफ्लेक्टर के जरिए स्क्रीन पर फिल्म दिखाई। फिल्म का मुख्य नायक दाढ़ी-मूछ वाला था। उसका एक कंधा उठा-उठा था। अहम मौकों पर वह लूंगी पहनता है। बॉस के सामने रौब से पैर पर पैर रखकर बैठता है। सभी गुर्गों ने पूरी फिल्म देखी और बहुत खुश हुए। फिल्म खत्म होने के बाद बॉस ने एक गुर्गे को खड़ा किया और पूछा- इससे क्या सीखा? गुर्गा खुशी से चहका, बोला-डांस करते वक्त पैर से चप्पल निकल भी जाए, तब भी डांस कंटीन्यू कर सकते हैं। बॉस ने उसी की चप्पल से उसे धुना और फिर कहा कि डोडा पोस्त की तस्करी के तरीके इस फिल्म से सीखो। गुर्गों ने सीरियसली दोबारा फिल्म देखी और सारे गुर सीख लिए। इसके बाद राजस्थान-गुजरात-महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश बॉर्डर पर डोडा पोस्त की तस्करी की बाढ़ आ गई। उत्साहित उद्योगपतियों ने तो राजस्थान में ड्रग्स फैक्ट्रियां तक लगा ली। डंपर में बजरी भरी है, बजरी खाली करने को डंपर उठाया तो नीचे नशे की बोरियां। दूल्हा-दुल्हन के लिए सजी स्कॉर्पियो में बोरियां, स्पीड पोस्ट की वैन में बोरियां, एटीएम में पैसा डालने वाली वैन में बोरियां, एंबुलेंस में बोरियां, गेहूं के कट्‌टों के बीच में नशे की बोरियां। आखिर पुलिस ने भी वही फिल्म देखी और फिर धरपकड़ को अंजाम देना शुरू किया। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने खाकी को सलाह दे दी- 500 रुपए के चक्कर में बजरी वाला ट्रक मत छोड़ देना, अच्छे से चेक करना, नीचे करोड़ों का माल न हो। 4. चलते-चलते.. स्मार्ट फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने माननीयों के छुपे हुए हुनर को भी आम जनता के बीच खोलकर रख दिया है। कन्हैया दंगल में नेता तो पहले भी नाचते थे, लेकिन तब न कैमरे वाले मोबाइल थे और न ही रील बनाकर शेयर करने के लिए इंस्टाग्राम। इसलिए राजनीति से हटकर कोई घटनाक्रम होता भी, तो वह अखबारों में फीचर की तरह ही लिखा जाता था। या फिर कैप्शन के साथ फोटो फीचर चल जाता था। लेकिन अब अगर किरोड़ी बाबा ठुमका लगा दें, या जूली जी बेटी के ब्याह में पंजाबी गीत पर भंगड़ा कर दें, या फिर कैलाश चौधरी जी भाई की शादी में थोड़े हाथ खोल लें तो वीडियो पूरी दुनिया में फैल जाते हैं। माननीयों के डांस की फेहरिस्त में बगरू विधायक कैलाश वर्मा का नाम भी जुड़ गया है। परिवार की एक शादी में उन्होंने ‘खई के पान बनारस वाला’ पर नृत्य का खूब टैलेंट दिखाया। बाकायदा पान खाकर डांस किया। अब सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इनपुट सहयोग- मुकेश नागर (बूंदी), नीरज हरिव्यासी (सिरोही), मनोज सैनी (चौमूं, जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..

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