राजस्थान हाईकोर्ट ने नगरपरिषद में आयुक्त पद के बराबर योग्यता वाले की नियुक्ति नहीं होने के प्रकरण में आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्वायत्तशासन विभाग के प्रिसिंपल सैकेट्री, डायरेक्टर-स्पेशल सैकेट्री, जिला कलेक्टर व आयुक्त को नोटिस दे कर स्पष्टीकरण मांगा है। हाईकोर्ट ने स्वायत्तशासन विभाग के निदेशक द्वारा 9 मई 2025 को नगरपरिषद आयुक्त का चार्ज धर्मेंद्रकुमार मीणा को देने के जारी किए गए आदेश के क्रियान्वयन को भी स्थगित कर दिया है। जानकारी के अनुसार 9 मई 025 को नगरपरिषद के आयुक्त का चार्ज धर्मेंद्रकुमार मीणा को दिया गया था। जो सेवा नियमों के विपरीत था, क्योंकि सेवा नियमों के अनुसार केवल कार्यकारी अधिकारी व सचिव ही आयुक्त के पद पर पदोन्नत किए जा सकते हैं। इस पर बूंदी निवासी सूरज बिरला ने उक्त आदेश को हाईकोर्ट जयपुर में चुनौती दी। जिसमें 15 फरवरी 2021 को हाईकोर्ट जोधपुर पीठ द्वारा पारित आदेश श्रवणराम बनाम राज्य सरकार का हवाला दिया गया। बिरला ने जयपुर हाईकोर्ट को बताया कि जोधपुर पीठ के आदेश में राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश है कि प्रदेश में कहीं भी कमिश्नर पद की योग्यता नहीं रखने वाले को पद पर नहीं लगाया जाए। आदेश में न्यायालय द्वारा सरकार को प्रतिबंधित किया हुआ है कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो नियमानुसार आयुक्त पद के योग्य न हो, उक्त पद का चार्ज नहीं दिया जाए। नियुक्ति के आदेश को स्थगित कर दिया जयपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी चौबीसा ने बताया कि हाईकोर्ट ने 18 फरवरी को आदेश जारी किया है। जिसमें न्यायालय ने बूंदी नगरपरिषद की नियुक्ति के आदेश को स्थगित कर दिया है। न्यायालय के अनुसार तो वर्तमान आयुक्त अब आयुक्त के पद पर नहीं रह सकते। जोधपुर हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में जारी किए एक आदेश का हवाला देते हुए रीट लगाई थी। जिसमें प्रदेश सरकार को आदेश दिए थे कि जो आयुक्त पद की योग्यता नहीं रखता, वह आयुक्त नहीं रह सकता।


