भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा ‘सस्टेनेबल अप्रोचिज़ इन माइक्रोबियल एंड नेचुरल प्रोडक्ट-बेस्ड थैरेप्यूटिक्स’ विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरयूएसए) 2.0 के सहयोग से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विचार साझा किए। सम्मेलन में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए प्रोबायोटिक्स, बैक्टीरियोफेज थैरेपी और एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स जैसे विकल्पों पर चर्चा हुई। एम्स के डॉ. रुपेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्रोबायोटिक बैक्टीरिया के जरिए ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) को कम किया जा सकता है। अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रो. पिनाकी पनीग्राही ने नवजात शिशुओं में संक्रमण (सेप्सिस) रोकने में प्रोबायोटिक्स के सफल क्लीनिकल ट्रायल की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने पौधों और फंगस से कैंसर व न्यूरोपैथिक दर्द की नई दवाएं विकसित करने और माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स को बायोमार्कर के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। अकादमिक मामलों के डीन प्रो. हरविंदर सिंह सैणी और विभागाध्यक्ष डॉ. सुखराज कौर ने बताया कि इस मंच ने शोधकर्ताओं को नवाचार के लिए प्रेरित किया है। कार्यक्रम में यूके, अमेरिका और एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों सहित बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया।


