प्रो दविंदरपाल भूल्लर की रिहाई की फाइल रिजेक्ट:सजा समीक्षा बोर्ड ने लिया फैसला, अगली सुनवाई 13 फरवरी को

1993 दिल्ली ब्लास्ट केस का दोषी प्रोफेसर देविंदरपाल सिंह भुल्लर की दयापूर्ण रिहाई की अपील वाली फाइल को रिजेक्ट कर दिया गया है। सजा समीक्षा बोर्ड ने ये फैसले 23 दिसंबर 2025 को लिया था। अब इस केस की अगली तारिख 13 फरवरी है। उम्रकैद के मामलों में 51 केस पर विचार करने के लिए बैठक रखी गई थी। सजा समीक्षा बोर्ड ने प्रो. भुल्लर सहित 25 दोषियों की रिहाई की फाइल को रद्द किया है। भुल्लर इस समय अमृतसर के गुरु नानक अस्पताल में उपचारधीन है। बता दें कि देवेंद्रपाल सिंह भुल्लर पिछले 28 वर्षों से जेल में बंद रहे हैं और पिछले 14 वर्षों से भुल्लर का इलाज अमृतसर के सरकारी अस्पताल में भी चलता रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला था, उस समय भी अदालत ने उनकी मानसिक स्थिति और दया याचिका में देरी को ध्यान में रखा था सिलसिलेवार तरीके से जानें कौन हैं दविंदर भुल्लर… बठिंडा जिले में जन्मा था भुल्लरः देविंदरपाल सिंह भुल्लर 1960 के करीब पंजाब के बठिंडा जिले में जन्मा था। वे केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई कर चुके हैं। वे लुधियाना में एक लेक्चरार के रूप में कार्यरत थे। भुल्लर की जानकरी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से जुड़ी है और उन्हें 1993 दिल्ली बम धमाके में मुख्य आरोपी माना जाता है।
भुल्लर पर आरोपः है कि उन्होंने सितंबर 1993 में युवा कांग्रेस के नेता मनिंदरजीत सिंह बिट्टा की कार पर बम विस्फोट की साजिश रची। इस धमाके में नौ लोगों की मौत हुई और तीस से अधिक लोग घायल हुए। इस जुर्म के लिए उन्हें टाडा अदालत ने मौत की सजा सुनाई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। 1995 से भुल्लर जेल में हैं।
2012 में कोर्ट ने याचिका खारिज कीः कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि दया याचिका में आठ साल की देरी हुई, जिससे मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया। भुल्लर को गंभीर मानसिक रोग स्किजोफ्रेनिया है, जिस कारण उनका इलाज अमृतसर के सरकारी मेडिकल अस्पतालों में किया जा रहा है।
भुल्लर पंजाब के अमृतसर सेंट्रल जेल में कैदः भुल्लर की रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा और मांगें जारी हैं, जिनमें मानवाधिकार और मानवीय आधार पर उनकी रायती का समर्थन किया जाता है। इसके साथ ही उनकी रिहाई की भी मांग भी कई सिख संगठन करे रहे हैं।

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