मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि मैंने जिन परिस्थितियों में उदयपुर विश्वविद्यालय में ज्वॉइन किया था, तब मुझे लगा था कि स्व. विजय श्रीमाली यहां होते तो ये परिस्थितियों पैदा ही नहीं होती। कुलगुरु प्रो. सारस्वत आज उदयपुर के कॉमर्स कॉलेज के सभागार में अजमेर में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति और वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन विश्वविद्यालय महाविद्यालय उदयपुर के डीन प्रो. विजय श्रीमाली की याद में व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। ‘प्रकृति, समाज और नेतृत्व : भारतीय दृष्टि’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजसमंद के पीपलांत्री से पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल थे। विशिष्ट अतिथि उदयपुर यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रवींद्र श्रीमाली थे। व्याख्यान के दौरान कुलगुरु सारस्वत ने कहा- विजय श्रीमाली बहुत संवेदनशील, साहसी थे। श्रीमाली यहां होते तो ये परिस्थितियों पैदा ही नहीं होती। वे उन सब प्रतिकूल परिस्थितियों को ठीक कर देते या उसे पैदा करने वालों को बहुत पहले ही रवाना कर देते। इतना अदम्य साहस उस व्यक्ति में था। वे मन और दिल से जुड़े हुए थे, कोई व्यक्ति यहां का मालिक बनकर विवि को रोंदने का प्रयास करें या इस मेवाड़ की धरती का अपमान करें, वे सहन करने की स्थिति में नहीं होते थे। कुलगुरु प्रो. सारस्वत ने कहा कि प्रो. विजय श्रीमाली ऐसे व्यक्तित्व थे जो केवल अपने समय में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में स्थायी रूप से बस जाते हैं। विद्यार्थियों की फीस भरना, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करना और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहना उनके स्वभाव का हिस्सा था। मुख्य वक्ता श्यामसुन्दर पालीवाल ने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन नीतियों या भाषणों से नहीं, बल्कि धरातल पर लगातार किए गए कर्म से आता है। उन्होंने कहा कि राजसमंद जिले का पिपलांत्री मॉडल इसी सोच का परिणाम है, जहां खनन क्षेत्र से घिरे एक गांव को सस्टेनेबल डेवलपमेंट और स्वरोज़गार के केंद्र में बदला गया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से इस दिशा में 150 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत होना, इस मॉडल की विश्वसनीयता और सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पिपलांत्री में लाखों वृक्ष आज केवल हरियाली नहीं, बल्कि हजारों परिंदों का घरौंदा बन चुके हैं। कन्या जन्म पर 111 पौधे लगाने की परंपरा ने पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक चेतना से जोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि आज पिपलांत्री 1.5 करोड़ से अधिक की आय कार्बन क्रेडिट से कर रहा है जो की भारत में पंचायत स्तर पर प्रथम प्रयास है। उन्होंने कहा कि विरोध और कठिनाइयों के बावजूद सिद्धांतों से समझौता न करना ही नेतृत्व की असली कसौटी है। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र, स्थानीय रोज़गार और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें, तभी बेहतर भारत का निर्माण संभव है-और यही पिपलांत्री मॉडल का मूल संदेश है। विशिष्ट अतिथि रविंद्र श्रीमाली ने प्रो. श्रीमाली के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें प्रकृति और समाज सेवा के क्षेत्र में धरातल पर काम करने वाला कर्मयोगी बताया। युवाओ से उन्होंने प्रो श्रीमाली के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर समाज हित में आगे आने का आह्वान किया। स्वागत उद्बोधन वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने दिया एवं डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. विजय श्रीमाली के पुत्र एवं होटल एसोसिएशन उदयपुर के पूर्व सचिव जतिन श्रीमाली , डॉ. शिल्पा वर्डिया, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राव, डॉ. हेमराज चौधरी, डॉ. सचिन गुप्ता, डॉ. विनोद कुमार मीणा, डॉ. रेनू शर्मा, डॉ. आशा शर्मा, डॉ. पारुल दशोरा, डॉ. पुष्पराज मीणा सहित अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे। व्याख्यान में प्रो. जी. सोरल, प्रो. सी.पी. जैन, प्रो. पी.के. सिंह, प्रो. ओ.पी. जैन, प्रो. बी.एल. हेड़ा, भाजपा नेता अनिल सिंघल, सिद्धार्थ शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। उल्लेखनीय है कि मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा उस समय विवादों में आईं थीं, जब यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने औरंगजेब को कुशल प्रशासक और अकबर को महान बताया। इस बयान के बाद छात्रों और शिक्षकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और आंदोलन भी हुए। लगातार दबाव के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसे राजभवन ने स्वीकार कर उन्हें पदमुक्त कर दिया था।


