अलवर शहर में जमीन के सौदे को लेकर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हसनखां मेवात नगर निवासी दयाराम यादव ने आरोप लगाया है कि उनसे 14 लाख रुपये लेकर प्लॉट बेचने का वादा किया गया, कब्जा भी दे दिया गया, लेकिन बाद में वही जमीन किसी और के नाम रजिस्ट्री करा दी गई। परिवादी ने ललित,भोरेलाल,मीना देवी सहित सतीश जैन पर मामला दर्ज कराया है। ऐसे हुआ सौदा परिवादी के अनुसार, खुदनपुरी क्षेत्र में स्थित एक प्लॉट (20×50 फुट) का इकरारनामा 22 दिसंबर 2015 को 14 लाख रुपये में ललित पुत्र अमरचंद ने दयाराम की पत्नी सावित्री देवी के नाम किया था। पूरी रकम लेने के बाद प्लॉट का कब्जा भी दे दिया गया। दयाराम का कहना है कि उनकी पत्नी ने प्लॉट पर नींव भरवाई, बाउंड्रीवाल बनाई और गेट लगाकर ताला लगा दिया। इकरारनामे में यह भी तय हुआ था कि जरूरत पड़ने पर विक्रेता रजिस्ट्री (बयनामा) करवा देगा। रजिस्ट्री टाली, फिर दूसरे के नाम कर दी परिवादी का आरोप है कि कई साल तक रजिस्ट्री नहीं करवाई गई। जब 8 जनवरी 2026 को वह प्लॉट देखने पहुंचे तो कुछ लोग वहां पहुंचे और कब्जा करने की कोशिश की। पूछताछ में पता चला कि 26 दिसंबर 2025 को उसी प्लॉट की रजिस्ट्री सतीश कुमार जैन के नाम करा दी गई। दयाराम का कहना है कि यह सब आपसी साजिश और धोखाधड़ी से किया गया है। आरोप है कि विक्रेता ने मूल खातेदारों से मिलकर पुराने रिकॉर्ड के आधार पर रजिस्ट्री करवा दी और उनकी 14 लाख रुपये की राशि भी वापस नहीं की। पुलिस ने नहीं सुनी तो कोर्ट पहुंचे परिवादी ने बताया कि उन्होंने पहले वैशाली नगर थाने और पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


