भरतपुर के व्यस्ततम एनएच-21 पर ऊंचा नगला से सारस चौराहे होते हुए शीशम तिराहे तक लगभग 201 करोड़ की लागत से 4- लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर का निर्माण होना है, लेकिन प्रस्तावित एलिवेटेड फ्लाईओवर अब पर्यावरणीय शर्तों में उलझ गया है। परियोजना के दायरे में आ रहे 1886 पेड़ों की कटाई के बदले नियमों के तहत 18 हजार से अधिक पौधे टीटी-जेड क्षेत्र में लगाने होंगे। पर, वन विभाग के पास इतने बड़े स्तर पर पौधरोपण के लिए टीटीजेड क्षेत्र में 20 हेक्टेयर जमीन ही उपलब्ध नहीं है, जिससे पूरा प्रोजेक्ट ठहर गया है। फ्लाईओवर का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को करना है। चूंकि यह इलाका ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटी-जेड) में आता है, इसलिए यहां पर्यावरण संरक्षण के कड़े नियम लागू हैं। वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई की अनुमति तभी मिल सकती है, जब उसके बदले निर्धारित अनुपात में पौधरोपण और वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई जाए। नियमों के मुताबिक, 1886 पेड़ों की कटाई के एवज में 10 गुना से अधिक पौधे लगाने होंगे, यानी 18 हजार से ज्यादा पौधे। भरतपुर. हाइवे के दोनों तरफ खड़े पेड़ों को काटा जाएगा। टेंडर नोटिस जारी निर्माण कार्य के लिए टेंडर नोटिस भी जारी कर दिया गया है। फ्लाईओवर पिलरों पर आधारित होगा और इसे छह लेन में तैयार किया जाएगा। एक ओर तीन लेन तथा दूसरी ओर तीन लेन की होगी। दोनों तरफ सात-सात मीटर चौड़ी सर्विस लाइन बनाई जाएगी। इसके साथ ही फ्लाईओवर अंडरपास पिलर पर होने के कारण लोग नीचे भी आवागमन कर सकेंगे। “वन विभाग ने नॉन टीटीजेड क्षेत्र की जगह दे दी है। हम टीटीजेड अथॉरिटी के सामने प्रस्ताव रखेंगे। यदि टीटीजेड में भूमि नहीं मिलती तो उसके आसपास की जगह पर भी पौधरोपण कर सकते हैं।” -भगत सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर ( एनए आई) “टीटीजेड क्षेत्र में वन विभाग के पास 20 हेक्टेयर जगह नहीं है। जहां पौधोपण किया जा सके। हमने बयाना के पास बल्ल भगढ़ में पौधे लगाने के लिए जमीन देने का प्रस्ताव एनए सआई को दिया है,लेकिन वह जगह टीटीजेड क्षेत्र में नहीं है।” – प्रमोद धाकड़, डीएफओ


