फतेहगढ़ साहिब में बंदी सिंह मुद्दे पर गरमाई सियासत:सिमरनजीत सिंह मान बोले- 2 मार्च तक पैरोल न मिली तो संघर्ष तेज

पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के हवारा कलां गांव में आयोजित चढ़दी कला पंथक सभा में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने वाघा बॉर्डर पर बड़ा आंदोलन छेड़ने और जरूरत पड़ने पर रावी नदी पार कर पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब तक जाने की बात कही है। यह सभा सरबत खालसा द्वारा नियुक्त जत्थेदार जगतार सिंह हवारा के पैतृक गांव में आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न पंथक, सियासी, सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने बंदी सिंहों की रिहाई के लिए चल रहे आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि पंजाब सरकार 2 मार्च तक जगतार सिंह हवारा को उनकी बीमार माता से मिलने के लिए पैरोल नहीं देती है, तो सभी संगठन मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर चल रहे कौमी इंसाफ मोर्चा में शामिल होकर संघर्ष तेज करेंगे। इस दौरान जगतार सिंह हवारा की माता नरेंद्र कौर को एंबुलेंस से पंडाल में लाया गया। अपने संबोधन में सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई और किसानों के मुद्दों को जोड़ते हुए वाघा बॉर्डर पर एक बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस आंदोलन की तारीख होला मोहल्ला के अवसर पर घोषित की जा सकती है। सिमरनजीत सिंह मान के बयान का सबसे विवादास्पद हिस्सा तब सामने आया जब उन्होंने कहा कि यदि वाघा बॉर्डर पर आंदोलन के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे रावी नदी पार कर करतारपुर साहिब तक जाने की योजना बनाएंगे। करतारपुर साहिब पाकिस्तान में स्थित है। विधानसभा में प्रस्ताव की मांग सभा में शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत के अध्यक्ष एवं पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि जैसे तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर कैदियों की रिहाई का रास्ता निकाला, वैसे ही पंजाब में भी ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में पंथक कहलाने वाली सरकारों ने इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई। वहीं विधायक मनप्रीत सिंह इयाली ने बताया कि उन्होंने विधानसभा के स्पीकर को पत्र लिखकर आगामी बजट सत्र में दो प्रस्ताव लाने की मांग की है- एक बंदी सिंहों की रिहाई के लिए और दूसरा खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह पर लगाए गए एनएसए को हटाने के लिए। सभा के दौरान किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल के संबोधन के समय हल्का तनाव भी देखने को मिला। भीड़ में से आई किसी टिप्पणी के बाद उन्होंने अपना भाषण बीच में रोक दिया और मंच से माफी मांग ली। बाद में आयोजकों ने अपील की कि किसी भी वक्ता को सार्वजनिक रूप से बीच में न रोका जाए। पैरोल नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी कौमी इंसाफ मोर्चा के नेता पाल सिंह फ्रांस ने कहा कि यदि 2 मार्च तक पैरोल नहीं दी गई, तो आंदोलन को और तीखा किया जाएगा और अरदास कर राजनीतिक जवाबदेही तय करने की बात कही जाएगी। साथ ही पंथक एकता के लिए एक नई कमेटी गठित करने की घोषणा भी की गई, जिसकी संरचना जगतार सिंह हवारा तय करेंगे। कुल मिलाकर हवारा कलां का यह पंथक एकत्र बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े आंदोलन को नई दिशा देने के साथ-साथ सिमरनजीत सिंह मान के बयान के कारण राष्ट्रीय स्तर पर बहस का मुद्दा बन गया है। अब राजनीतिक नजरें 2 मार्च और प्रस्तावित वाघा बॉर्डर आंदोलन पर टिकी हुई हैं।

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