पंजाब के फरीदकोट में सीनियर कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों ने राज्य सरकार के उस फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की है, जिसके तहत गांवों की पंचायतों को केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्त आयोग की ग्रांट से वाटर वर्क्स के बिजली बिल अदा करने के निर्देश जारी किए गए। उन्होंने इसे पंचायतों की आर्थिक हालत कमजोर करने वाला और गांवों के विकास को रोकने वाला फैसला करार दिया। पूर्व विधायक ढिल्लों ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक में गांवों के वाटर वर्क्स के बकाया बिजली बिल पूरी तरह माफ किए गए थे और भविष्य में इनका भुगतान सरकार द्वारा करने का फैसला किया गया था, ताकि पंचायतें बिना किसी आर्थिक बोझ के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि, मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार, उस फैसले को दरकिनार करते हुए पंचायतों को मजबूर कर रही है कि वे अपनी विकास ग्रांट से बिजली बिल भरें, जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग की ग्रांट पंचायतों को सड़कों, गलियों, नालियों, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए मिलती है। यदि इसी सीमित राशि का इस्तेमाल बिजली बिलों के भुगतान में कर दिया गया तो गांवों में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे और इसका सीधा नुकसान ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। 4 साल के कार्यकाल में पंचायतों को नहीं दी कोई ग्रांट-किक्की ढिल्लों पूर्व विधायक किक्की ढिल्लों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल के दौरान पंचायतों को विकास के नाम पर कोई ठोस ग्रांट नहीं दी। उल्टा अब सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पंचायतों पर वाटर वर्क्स के बिजली बिलों का नया बोझ डाल रही है। पूर्व विधायक ने इस मुद्दे पर पंचायत यूनियन द्वारा शुरू किए गए संघर्ष को पूरी तरह जायज बताते हुए उसका समर्थन करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो कांग्रेस पार्टी द्वारा इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर संघर्ष किया जाएगा।।


