बलरामपुर जिले के कुसमी और शंकरगढ़ सहकारी बैंक में 24 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इसे बैंक के अफसर और कर्मियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। फर्जीवाड़े के लिए अफसरों ने फर्जी अकाउंट खोल रखे थे और इसी में किसानों के लोन की राशि ट्रांसफर कर निकाल लेते थे। जांच में सरकारी विभागों के नाम से भी ऐसे फर्जी एकाउंट मिले हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में ब्रांच मैनेजर सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बलरामपुर एसपी वैभव बेंकर ने बताया कि इस मामले में कई और फर्जी बैंक एकाउंट और इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ धारा 409, 420,467,471,120 बी 34 के तहत कार्रवाई की गई है। भास्कर इनसाइट अफसर चला रहे थे अपना बैंक
कुसमी और शंकरगढ़ सहकारी बैंक में अफसरों ने फर्जी खाते खोलकर घोटाले का खेल 12 साल से चल रहा था। फर्जीवाड़े के तीन खाते सामने आए हैं। जमड़ी समिति से 19.92 करोड़ रुपए, जनपद पंचायत शंकरगढ़ से 91.57 लाख रुपए और नरेगा धनेशपुर से 3.19 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। जांच में सामने आया कि अफसरों ने सरकारी विभागों के नाम पर भी फर्जी खाते खोले थे। जब किसी विभाग ने खाता खोलने आवेदन दिया तो उसी दस्तावेज पर दूसरा खाता खोल दिया गया। किसानों के लोन की राशि इन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर अफसरों ने निकाल ली। जिस तरह लोन का फर्जीवाड़ा किया गया, उससे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि फर्जी खाते से सरकार की कर्ज माफी योजना में भी करोड़ों की बंदरबांट की गई होगी। अफसरों ने बैंक का पूरा सिस्टम बिगाड़ दिया था। वे अपना अलग बैंक चला रहे थे। कलेक्टर और को-आपरेटिव बैंक के प्राधिकृत अधिकारी विलास भोस्कर संदीपन की सख्ती के बाद घोटाले का खुलासा हुआ। पड़ताल में ये भी पता चला है कि शिकायत के बाद नाबार्ड ने बैंक से जांच कर इसकी रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अंबिकापुर में घोटालेबाजों को संरक्षण दे रहे अफसर रिपोर्ट देते रहे कि गड़बड़ी नहीं हुई है। जांच में सामने आया कि फर्जी खातों से करोड़ों रुपए अंगूठा लगाकर निकाले गए। कुसमी शाखा द्वारा जारी 386 में से 275 वाउचर शाखा में नहीं मिले। जो वाउचर मिले, उनमें खाताधारक की जगह किसी और के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान मिले। सहकारी समिति जमड़ी के नाम से संचालित खाते से 19 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ। इस खाते का संचालन समिति अध्यक्ष और प्रबंधक को करना था, लेकिन किसी और ने किया। अंबिकापुर की ज्वेलरी दुकान में भेजे पौने दो करोड़ रुपए: जांच में खुलासा हुआ है कि कुसमी सहकारी बैंक से अंबिकापुर की ज्वेलरी दुकान जमुना अलंकार को भी पौने दो करोड़ का भुगतान किया गया है। इसमें 52 बार ट्रांजेक्शन हुआ। बैंक मैनेजर अशोक सोनी ने खुद कई बार इसमें ट्रांजेक्शन किया। एनईएफटी ट्रांजेक्शन से कुल 1. 82 करोड़ रुपए की राशि स्थानांतरित की गई है, जिसमें कुल 52 ट्रांजेक्शन में से 44 ट्रांजेक्शन में वाउचर और सहायक दस्तावेजों नहीं मिले।घोटाले के बाद कुसमी और शंकरगढ़ सहकारी बैंक के सभी खातों की जांच के आदेश दिए गए हैं। दोनों बैंकों में आठ समितियों के 13,636 खाते हैं। पहले कुसमी में ही बैंक था। बाद में कुछ समितियों को अलग कर शंकरगढ़ ब्रांच बनाई गई। घोटाले में शामिल अधिकारी इन्हीं बैंकों में तैनात रहे।
– एसपी सिंह, सीईओ, जिला सहकारी बैंक घोटाले में नोडल अफसर भी: सहायक मुख्य पर्यवेक्षक अशोक सोनी, संस्था प्रबंधक लक्ष्मण देवांगन, शाखा प्रबंधक शंकरगढ़ विजय उइके, प्रभारी क्लर्क तबारक अली, प्रभारी अतिरिक्त प्रबंधक अंबिकापुर राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय, समिति सेवक शंकरगढ़ सुदेश यादव, सहायक मुख्य पर्ववेक्षक एतबल सिंह, कम्प्यूटर ऑपरेटर कुसमी प्रकाश सिंह, सहायक लेखापाल जगदीश भगत, सहायक मुख्य प्रवेक्षक-शाखा प्रबंधक कुसमी सबल राय, वरिष्ठ पर्यवेक्षक विकास चंद्र पांडवी।


