गैरकानूनी तरीके से पट्टे देने वाली गृह निर्माण सहकारी समितियों पर आगे भी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है। सहकारी विभाग के प्रस्तावित नए कानून को-ऑपरेटिव कोड-2025 का जो ड्राफ्ट बना था, उसमें से हाउसिंग सोसायटियों को लेकर रखे कड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। विधानसभा में पहुंचने से पहले ही ड्राफ्ट में संशोधन हो गया। संशोधन के बाद ड्राप्ट विधि विभाग में भेजा गया है। कठोर प्रावधान वाला ड्राफ्ट आज भी सहकारी विभाग की वेबसाइट पर मौजूद है। तय हुआ है कि इन्हें उपनियमों में रखा जाएगा। सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक कहते हैं- कानून में खास बदलाव नहीं हैं, कई विभागों की प्रक्रिया है। विधि विभाग के परीक्षण के बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसे इसी सत्र में पेश किया जा सकता है। ये थे प्रावधान- बैकडेट पट्टे अपराध होते, सोसायटीज हर साल सदस्यों का ब्यौरा देती, जमीन खरीद की रजिस्ट्री जरूरी होती, 60 दिन में पट्टा रजिस्टर्ड 1. सोसायटी बैकडेट में भूखंड, प्लैट या आवास का आवंटन नहीं कर सकेगी।
यानी- पहली बार कानून में स्पष्ट किया जाता। कानूनी भूमिका तय करना आसान रहता है।
2. सोसायटी सदस्य के आवंटन पत्र की रजिस्ट्री करवाना अनिवार्य।
यानी- रजिस्टर्ड होने के बाद बदलाव संभव नहीं। बैकडेट आवंटन पत्र नहीं दे पाते।
3. आवंटन में नकद लेनदेन पर प्रतिबंध।
यानी- लेनदेन के विवाद नहीं होंगे, बैंक लेनदेन से समिति संचालक सदस्यों की निगरानी होती।
4. किसी योजना के लिए सोसायटी स्थानीय निकाय से जमीन लेगी। बाहर से जमीन लेने पर रजिस्ट्री के माध्यम से ही खरीद हो सकेगी।
यानी- अभी तक सोसायटी एग्रीमेंट से जमीन का सौदा करती है। ऐसे में रेवन्यू रिकॉर्ड (जमाबंदी) पर खातेदार का नाम यथावत रहता है। जमीन एक से अधिक बार बिकने की अशंका रहती है। रजिस्ट्री होने से इस पर रोक लगेगी।
5. भूखंड योजना, आवासीय या फ्लैट किसी भी योजना के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी होगी।
यानी- विभाग के पास रिकॉर्ड होता कि कौनसी सोसायटी किस योजना पर काम कर रही है।
6. आवंटन के समय जमीन पर सरकारी दस्तावेज (गिरदावरी) में कृषि होने की जानकारी या किसी अन्य संस्था के कब्जे होने की पुष्टि होती है तो वह अपराध माना जाएगा।
यानी- कृषि भूमि पर हर वर्ष गिरदावरी होती है। सरकारी रिकॉर्ड पर रहता है कि किस जमीन पर किस समय कौन सी फसल थी। अभी तक गिरदावरी को आवंटन जैसे मामलों में शामिल ही नहीं किया जाता है।
7. सोसायटी संपत्ति बेचने-खरीदने पर 60 दिवस में इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को देगी। हर साल सदस्यों की सूची भी देनी होगी।
यानी- सरकार के पास भी खरीद फरोख्त की जानकारी होती। रजिस्ट्रार के पास सदस्यों की जानकारी होती तो डबल पट्टे का खुलासा होता।


