फर्जी पट्टों पर लगी भ्रष्टाचार की सील:भास्कर: पट्टे चाहिए, बिना नियमन कॉलोनी काटनी है, रेट क्या है? सोसायटी: 50 रुपए गज में पट्टे देंगे, दफ्तर में रिकॉर्ड भी बदलवा देंगे

हमारी कमाई-घर का सपना लूट रही हैं सोसायटी, जेडीए-सहकारिता विभाग, आंखें खोलो…रोको सरकार

शहर को व्यवस्थित बसाने वाला जेडीए, फ्राड करने वालों पर कार्रवाई करने वाली पुलिस और सहकारिता को बढ़ावा देने के नाम पर हाउसिंग सोसायटी बनाने वाला को-ऑपरेटिव डिपार्टमेंट…सिस्टम पूरा है। फिर भी जाली दस्तावेज से अवैध कालोनियां कट रही हैं, बस रही हैं। भले जमीन मंदिर माफी की हो या कोर्ट में उलझी हो। को-ऑपरेटिव सोसायटी वाले बैकडेट में पट्टे बना रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने कॉलोनाइजर बनकर सिस्टम के इसी कोलेप्स पर स्टिंग ऑपरेशन किया। जिन सोसायटीज के संचालन अधिकार सरकार ने छीन रखे हैं, जिस पर एक को-ऑपरेटिव इंस्पेक्टर को निगरानी का जिम्मा है, उन सोसायटी के पूर्व पदाधिकारी आज भी किसी भी डेट में पट्टा देने को तैयार हैं। उनका कहना है जेडीए वाले बीघा के हिसाब से 1-2 लाख लेंगे, नहीं दिए तो प्लाट बिकेंगे नहीं। ऑडिट करने वाला सोसायटी संचालक बन गया, बोला- कोर्ट रेफरेंस के मुताबिक सोसायटी बता दूंगा, डिपार्टमेंट रिकॉर्ड में कागज बदलने होंगे, हो जाएगा। ये सब तब, जबकि कानून है- सोसायटी कॉलोनी विकसित करने से पहले जमीन खरीद कर डिप्टी रजिस्ट्रार को प्लान पेश करेगी। अनुमति पर स्थानीय निकाय में भू-उपयोग परिवर्तन का आवेदन देगी। …लेकिन, पट्‌टे बन रहे हैं, रिकॉर्ड बदल रहा है…एक लाइन कही जाती है- सरकारी काम में पैसा चलता है। संचालक बोले- जमीन कोर्ट रेफरेंस हो या मंदिर माफी की, पहले कागज देखेंगे जैसा मामला है वैसी ही रेट लगेगी… सरकारी काम में पैसा चलता है भास्कर- कॉलोनी के लिए बैकडेट के पट्टे चाहिए।
50 रुपए प्रतिगज और 111 रु. सदस्य शुल्क। पट्टे 2007-08 के ठीक रहेंगे। उससे पहले के भी दे देंगे। 100-200 रु. लेता हूं। 50 सबसे कम रेट है। भास्कर- जेडीए वाले कार्रवाई तो नहीं करेंगे?
एक कमरा बनाकर बिजली कनेक्शन ले लेना। जेडीए वालों से आप बात करो, वो बगैर पैसे लिए छोड़ेंगे नहीं। सरकारी काम में पैसा चलता है। भास्कर- बैकडेट में एग्रीमेंट स्टाम्प कैसे मिलेंगे?
4-5 हजार रु. लगेंगे। सब हो जाएगा। जेडीए में बीघा के 1-2 लाख लेंगे भास्कर- कॉलोनी के लिए बिना रजिस्ट्री पट्टे चाहिए।
एग्रीमेंट करेंगे, 16 हजार फाइल चार्ज, जमीन नापने के 30 हजार लगेंगे। हम 50 रु. प्रति गज लेंगे। भास्कर- जेडीए कार्रवाई का डर तो नहीं?
जून 1999 की कटऑफ तक का रिकॉर्ड जमा है। इसके बाद कटऑफ डेट आएगी रिकॉर्ड जमा होगा। भास्कर- जेडीए की जिम्मेदारी किसकी रहेगी?
जेडीए की जिम्मेदारी आपकी होगी। जेडीए वालों से पहले बात करनी पड़ेगी। मैं मिलवा दूंगा इंस्पेक्टर से। एक बीघा के 1-2 लाख रु. लेंगे फिर दिक्कत नहीं है। दफ्तर रिकॉर्ड बदलने से रेट ज्यादा भास्कर- हरि नगर सोसायटी ज्यादा रेट ले रही है।
उनकी ऑडिट मैं ही करता हूं। बैकडेट पट्‌टे के लिए दूसरी सोसायटी है मेरे पास। 1999 से लेकर 2014 तक किसी भी तारीख के मिल जाएंगे। भास्कर- बैकडेट पट्टों की रेट क्या होगी?
जमीन पर रेफरेंस है या मंदिर माफी की है, वो बताना। रजिस्ट्रेशन रद्द वाली सोसायटी पट्टा देगी। भास्कर- बैकडेट में रेट ज्यादा क्यों है?
विभागों का इन्वॉल्वमेंट होता है। वहां रिकॉर्ड रहता है। रिकॉर्ड बदलना पड़ेगा, इसलिए रेट बढ़ जाती है। न रिकॉर्ड होगा न ऑडिट, हम कर देंगे भास्कर- बैकडेट के पट्टे चाहिए।
सोसायटी फादर संभालते थे। मैं ऑडिट के बाद काम करता हूं। बैकडेट में हसनपुरा सोसायटी वालों से दिलवा दूंगा। वो मेरे बड़े भाई की तरह हैं। भास्कर- को-ऑपरेटिव का झंझट तो नहीं ना? परेशानी क्या… सरकारी रिकॉर्ड पर आएगी नहीं, न ऑडिट होगा। सब सोसायटी स्तर पर हो जाएगा। भास्कर- जेडीए कार्रवाई क्यों करता है?
सोसायटी भू-परिवर्तन के बाद ही पट्‌टा दे सकती है। 90-बी बिना पट्टे काटने का अधिकार नहीं है।

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