फर्जी पुलिस बनकर लूट करने वाली गैंग का पर्दाफाश:5 आरोपी गिरफ्तार, महंगे शौक पूरे करने के लिए करते थे वारदात

अजमेर में फर्जी पुलिस बनकर युवक से 10 लाख 70 हजार की लूट की वारदात को अंजाम देने वाले 5 बदमाशों को क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
इनमें से पुलिस ने 2 आरोपियों को बापर्दा रखा है। दोनों बदमाशों को पुलिस ने राजस्थान के बाहर से डिटेन किया है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने महंगे शौक पूरे करने के लिए वारदात करना कबूल किया है। क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस मामले में पूछताछ में जुटी है। क्रिश्चियन गंज थाना प्रभारी अरविंद चारण ने बताया कि लोहाखान निवासी शराफत खान ने थाने पर मुकदमा दर्ज करवाया था। पीड़ित ने शिकायत देकर बताया कि उसके परिचित इरफान को 10 लाख 70 हजार रुपए दिए गए थे। जिसको सावित्री तिराहे पर कार में बदमाश उठाकर ले गए और मारपीट कर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया। मामले में मुकदमा दर्ज का टीम का गठन किया गया और कार्रवाई के निर्देश दिए गए। 2 आरोपी बापर्दा गिरफ्तार
थाना प्रभारिक अरविंद चारण ने बताया कि घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी को चेक किया गया। जिसमें पीड़ित के परिचित को स्विफ्ट डिजायर कार में बदमाश बैठ कर ले जाते हुए दिखाई दिए। इसके बाद मुखबिर को भी अलर्ट पर रखा। रूट चेक करने पर पता चला कि 2 आरोपी राजस्थान से बाहर निकल चुके हैं। इसके बाद टीम ने पीछा करते हुए 2 बदमाशों को बापर्दा गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद 3 को पकड़ा
थाना प्रभारी ने बताया कि वह दोनों बदमाशों को पूछताछ करने के बाद मामले में उनके अन्य साथी 3 युवक कुंदन नगर निवासी त्रिलोक सिंह उर्फ राजवीर सिंह (32) और हितांशु नरवरिया उर्फ मोनू (35) सहित अलवर गेट निवासी विष्णु वासनिक (36) पुत्र महादेव को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई में विशेष योगदान हेड कॉन्स्टेबल किशोर कुमार और कॉन्स्टेबल इमरान का रहा। बातों में उलझा कर बनाते थे शिकार
आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के रूप में यह वारदात को अंजाम देते हैं। पहले ऐसे राहगीर की पहचान करते हैं जो अकेला हो और उसके पास रुपए हैं। फिर उक्त गिरोह की एक अन्य टीम बाइक या कार लेकर उसके पास खड़ी हो जाती है। बाद में बातों में उलझा कर अपने साथ बैठा लेते हैं और सुनसान जगह पर ले जाकर मारपीट कर रुपए छीन लेते हैं। पूछताछ में बताया कि यह सभी आरोपी अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए वारदात को अंजाम देते थे।

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