फर्जी बैंक खातों से 2.5 करोड़ का अवैध लेनदेन:धनबाद साइबर पुलिस ने एक आरोपी को दबोचा, बैंक ऑफ बड़ौदा में खोले थे फर्जी खाते

धनबाद साइबर पुलिस ने फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में धनबाद नगर पुलिस अधीक्षक ऋत्विक श्रीवास्तव और साइबर पुलिस उपाधीक्षक संजीव कुमार ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा में फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते खोलकर अवैध लेनदेन किया जा रहा था। जांच के दौरान पता चला कि इन खातों से महज एक सप्ताह के भीतर लगभग 2.5 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। शिकायत की जांच में खुला पूरा मामला पुलिस के अनुसार, यह मामला साइबर थाना धनबाद में वादी विकास प्रसाद की शिकायत की जांच के दौरान सामने आया। जांच में कई लोगों की संलिप्तता पाई गई, जिनमें अमन कुमार सिंह, नैतिक कुमार, अमन जायसवाल, प्रियांश कुमार सिंह और मनीष कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है। पुलिस को जानकारी मिली कि इन लोगों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर अवैध पैसों के लेनदेन का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इसी नेटवर्क के जरिए बड़ी राशि को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था, जिससे साइबर अपराधियों को मदद मिलती थी। सरायढेला क्षेत्र से आरोपी की गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मामले में कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी अभियुक्त मनीष सिंह को सरायढेला थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ साइबर थाना कांड संख्या 53/25 के तहत आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मनीष सिंह की उम्र करीब 50 वर्ष है और वह विकास नगर, जगजीवन नगर स्थित चमरली टावर के पीछे का निवासी है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की, जिसमें अवैध लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने का करता था काम पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मनीष सिंह फर्जी बैंक खाते खुलवाने और उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने का काम करता था। ऐसे खातों को ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में पहले भी एक अन्य आरोपी प्रियांश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी कर रही है और पूरे गिरोह की गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है।

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