भास्कर न्यूज | अमृतसर सरहदी गांव सिंघोके में फेंसिंग पार 415 कनाल जगह की जाली रजिस्ट्री मामले में काबू पटवारी जोबनजीत का शुक्रवार को 2 दिन का रिमांड खत्म होने पर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है। मामले में अन्य 6 आरोपी अंडरग्राउंड हो गए हैं। विजिलेंस की टीमें आरोपियों को काबू करने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। वहीं, अब विजिलेंस को शक है कि फेंसिंग पास व बॉर्डर के आसपास सरकारी जमीन को हथियाने के लिए लैंड माफियाओं का कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। पटवारियों की मिलीभगत से कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है। दरअसल, 4 साल पहले गांव दरिया मंसूर में करीब 26 एकड़ जगह की जाली रजिस्ट्री कराने के मामले में विजिलेंस ने 3 पटवारियों को काबू किया था। मामला इस समय कोर्ट में है। इस जाली रजिस्ट्री को अंजाम देने में पटवारियों ने नायब तहसीलदार का जाली ऑर्डर तैयार किया था। इसके बाद गिरदावरी में नाम दर्ज कर दिया गया था। पुराने-नए केसों में फर्जीवाड़ा करने का तरीका सेम मिलने पर किसी गिरोह के एक्टिव होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। विजिलेंस के पास फेंसिंग पार जाली रजिस्ट्री की शिकायत 4 साल पहले हुई थी मगर 25 साल पहले जाली रजिस्ट्री की साजिश रची गई थी। पुराना मामला होने के कारण पटवार सर्कल से रिकार्ड न मिलने पर जांच में देरी होती गई। मेन मास्टरमाइंड तत्कालीन पटवारी जोगिंदर सिंह (मृतक) था, जिसने नायब तहसीलदार अजनाला के फर्जी आदेशों का हवाला देकर रोजनामचा में 14 दिसंबर 2001 रिपोर्ट नंबर 158 दर्ज की थी। इसके जरिए शेर सिंह, सतनाम सिंह, गुरमीत सिंह और कश्मीर सिंह को 235 कनाल 19 मरले जमीन का काश्तकार बना दिया गया था। इसी तरह फर्जीवाड़ा करते हुए रिपोर्ट नंबर 160 के जरिए 143 कनाल 11 मरले जमीन गुरमेज सिंह, रेशम सिंह और रणजीत सिंह के नाम कर दी गई। फिलहाल, जिस तरह से जाली रजिस्ट्री के कारनामों को अंजाम दिया जा रहा उसमें जाली ऑर्डर के केस सामने आ रहे हैं।


