मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जिले में शनिवार को छह ब्लॉकों में आयोजित कार्यक्रम में फर्जी तरीके से शादी कराने में जांच बैठ गई है। दैनिक भास्कर एप ने इस मामले को प्रमुखता से पब्लिश किया था। प्रमुख सचिव ने जांच के दिए आदेश
तीन ब्लॉकों में कई वर-वधुओं ने मंडप के नीचे बैठ पूजा-अर्चना तो की पर वधुओं ने न तो मांग में सिंदूर भरा और न ही जोड़ों ने फेरे लिए थे। इसके बाद वधुएं ससुराल की जगह मायके लौट गईं। जिसको संज्ञान में लेते हुए समाज कल्याण प्रमुख सचिव के निर्देश पर निदेशक प्रशांत कुमार ने उपनिदेशक महिमा मिश्रा को जांच करने के निर्देश दिए हैं। रुपयों के लालच में शादी करने पहुंचे थे
योजना के तहत एक जोड़े को कुल 51 हजार रुपए दिए जाते हैं। इसमें 35 हजार रुपए वधू के खाते में, 10 हजार रुपए के उपहार और बाकी धनराशि खाने समेत अन्य कार्यों में खर्च की जाती है। इसी आर्थिक मदद और उपहारों के लिए कर्मचारियों की मिली भगत से वर-वधुओं ने पंडाल के नीचे वरमाला पहनाकर दिखावे की शादी की। कागजों में जोड़ों की संख्या ज्यादा
यही नहीं समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कागजों में जोड़ों की ज्यादा संख्या दिखाकर वाह वाही लूट ली। सामूहिक विवाह के दौरान शिवराजपुर, नर्वल तहसील और विधनू ब्लाक में हुए सामूहिक विवाह में पंडितों ने वर-वधुओं से फेरे लेने का आह्वान करते हुए मंत्रोच्चारण शुरू किया तो कई जोड़े फेरे लेने के बजाय वहीं खड़े रहे। कई वधुओं ने तो मांग में सिंदूर भी नहीं भरवाया। सिर्फ माथे पर सिंदूर लगा लिया था। सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ था वायरल
वहीं विधनू ब्लाक में दो जोड़ों का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ जिसमें कार्यक्रम समापन के बाद कर्मचारी वर-वधू को माला पहनाकर फोटो खिंचवाने की बात कह रहे हैं। सामूहिक विवाह में उपहार के लिए शादी करने का खेल जब प्रमुखता से पब्लिश हुआ, तब समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर निदेशक ने संज्ञान लिया। उपहार और धनराशि की होगी वसूली
निदेशक ने उपनिदेशक समाज कल्याण को पत्र जारी कर जिले में जोड़ों की शादी की जांच करने के निर्देश दिए हैं। दो दिन में मामले की जांच कर रिपोर्ट निदेशक को देनी है। समाज कल्याण निदेशक के मुताबिक अगर फर्जी जोड़े मिलते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। दी गई उपहार और धनराशि की वसूली होगी।


