फल, शाकभाजी, पुष्प प्रदर्शनी देखने पहुंचे 3.5 लाख लोग:जनभवन में 1690 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, कई वर्गों में 1719 विजेता सम्मानित

जन भवन प्रांगण में चार दिनों तक चली 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 का सोमवार को भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में चयनित विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्रदर्शनी में रचनात्मकता, नवाचार और जनभागीदारी ने इसे अब तक की सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनी बना दिया। 6 से 9 फरवरी तक आयोजित इस प्रदर्शनी को 3.5 लाख से अधिक आगंतुकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा, जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से यह आयोजन लाखों लोगों तक पहुंचा। इस वर्ष कुल 1690 प्रतिभागियों ने भाग लिया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए 7771 प्रविष्टियां दर्ज की गईं, जिनमें से निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद 1719 विजेताओं का चयन किया गया। संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी को आमजन से विशेष सराहना मिली। उन्होंने इसे प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण बताते हुए कर्नल दीपक कुमार और उनकी टीम की प्रशंसा की। राज्यपाल ने कहा कि यह प्रदर्शनी हर वर्ष नए आयाम छू रही है और अब बच्चों, युवाओं व परिवारों की सक्रिय भागीदारी इसमें साफ दिखाई दे रही है। कला हर व्यक्ति के भीतर, उसे मंच देने की जरूरत
जन भवन में प्रदर्शित कलात्मक मॉडलों और वस्तुओं की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कला हर व्यक्ति के भीतर निहित होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानकर बाहर लाने की है। उन्होंने रचनात्मक वस्तुओं के निर्माण को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे समाज में नवाचार और आत्मविश्वास बढ़ता है। प्रदर्शनी में रामायण, श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने, राष्ट्रध्वज तिरंगे के इतिहास जैसे विषयों पर आधारित मॉडलों को राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का सशक्त प्रस्तुतीकरण बताया। उन्होंने कारागार विभाग सहित सभी प्रतिभागियों से भविष्य में और अधिक नवाचारपूर्ण मॉडल प्रस्तुत करने का आह्वान किया। रूफटॉप गार्डनिंग स्वास्थ्य और पर्यावरण का माध्यम
राज्यपाल ने रूफटॉप सब्जी एवं बागवानी को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से इसमें जुड़ने और घरों की छतों पर फल, फूल और सब्जियों के पौधे लगाने की अपील की। किसानों के योगदान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समाज का पोषण किसानों के परिश्रम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि यदि किसान न हो तो भोजन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रदर्शनी के दौरान किसानों के लिए स्वास्थ्य जांच, कैंसर, डेंटल और टीबी जांच शिविरों को उन्होंने जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। 155 स्टॉल, 46 हजार टिकट और 40 लाख की बिक्री
प्रदर्शनी में कुल 155 स्टॉल लगाए गए। चार दिनों में लगभग 46 हजार टिकटों की बिक्री से करीब 9 लाख रुपये की आय हुई, जबकि किसानों और उत्पादकों ने लगभग 40 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की। उद्यान मंत्री बोले- यह प्रदर्शनी बनेगी मील का पत्थर
कार्यक्रम में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि फल, फूल और सब्जियों की कलात्मक प्रस्तुतियों के साथ भारतीय सेना के शौर्य का प्रदर्शन प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी उद्यान विभाग के लिए मील का पत्थर साबित होगी और कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में और तेजी से काम करना होगा। इस वर्ष 23 वर्गों में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को चल वैजयन्ती और 5100 रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्राकृतिक फूलों से बनी आकृतियों, विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, रेलवे, सेना और नगर निगम सहित विभिन्न श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और विशिष्ट पुरस्कार दिए गए। स्कूली बच्चों की प्रतियोगिताओं में दिखी प्रतिभा
क्विज, लेटर राइटिंग और स्टाम्प डिजाइन प्रतियोगिताओं में लखनऊ के विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। विजेता बच्चों को मंच पर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में रचनात्मकता और प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहन मिला। राज्यपाल ने आयोजन से जुड़े सभी विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रतिभागियों, किसानों और आगंतुकों को बधाई देते हुए आशा जताई कि ऐसे आयोजन आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक होंगे तथा समाज, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समापन समारोह की 7 तस्वीरें…

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