शुक्रवार को जिले में किसानों ने अच्छी फसल उत्पादन के लिए मच्छुदरी माई की विधि विधान से पूजा की। दरअसल, हरदा में किसान परिवारों में बुआई पूरी होने के बाद धरती माता को आभार जताने के लिए मछुंदरी माई कीपूजा की जाती है। जिसे नदी पूजा भी कहा जाता है। बुआई पूरी होने के बाद किसान परिवार के सदस्य खेतों में जाते हैं और धरती माता के प्रति अपना आभार व्यक्त करने के लिए बड़े उत्साह के साथ यह पूजा करते हैं। जिले के सभी गांवों में इन पुरानी मान्यताओं को मानने वाले किसानों में उत्साह दिखा। किसान अपने खेतों में रवि फसल की बुआई पूरी होने के बाद विधि-विधान से मच्छुदरी माई की पूजा की। शुक्रवार को छोटी हरदा के किसान संतोष पटेल के खेत में परिवार एवं खेत में काम करने वाले परिवारों के साथ एकत्रित कर यह पारंपरिक पूजन किया। किसान परिवार और आसपास के सहित लोगों के साथ खेतों में जाकर घास व खाखरेकी झोपड़ी बनाकर उसमें मछुदरी की स्थापना कर पूजन करते है। जिसमें चने और गेहूं को उबालकर घुघरी बनाई जाती है। भोग लगाकर प्रसादी के रूप में बांटा जाता है। खाखरे के पत्तों से होता है मंडप तैयार ऐसी मान्यता है कि मछुन्द्री माई की पूजन में भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी के लिए खाखरे के पत्तों से मंडप बनाकर, उन्हें भगवान बलराम का आह्वान पर बंडे भरे जाते है। फिर परिवार के सभी सदस्य मिट्टी से बने भगवान की सांकेतिक प्रतिमाओं का विधि विधान से पूजन करते है और धरती माता से आगामी फसल अच्छी होने की कामना करते है। इसमें मिट्टी के पात्र में दूध को उफान कर जिस दिशा में दूध की धारा निकलती है। उसी बात से आगामी फसल कैसी होगी इस बात का भी अनुमान लगाया जाता है। अगर दूध उत्तर दिशा में गिरता है, तो बोई हुई फसल के पैदावार होने के अच्छे संकेत है। बाद में गेहूं और गुड़ से बनी घुघरी का भोग लगाया जाता है। वहीं, अंत में बच्चे खेतों के बीच लहलहाती फसल के बीच कुलाट लगाकर खुशी जताते जात है।


