पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम के बाद सीमावर्ती गांवों में जनजीवन सामान्य हो गया है। लोग युद्ध के भय को भूल चुके हैं और सामान्य रूप से अपने काम-काज में लग गए हैं। इस दौरान जहां फाजिल्का के सीमावर्ती गांवों के लोगों की बहादुरी और देशभक्ति देखने को मिली है, वहीं लोग हमारी बहादुर सेना का भी धन्यवाद कर रहे हैं, जिन्होंने दुश्मन की तरफ से आए ड्रोन हमले को नाकाम कर दिया। सीमावर्ती गांवों के लोग सेना को धन्यवाद देते देखे गए, क्योंकि उन्होंने लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया। प्रशासन लगातार लोगों के संपर्क में था और उन्हें हर तरह की जानकारी उपलब्ध करा रहा था। इस बार लोगों को अपने घर खाली करने के लिए भी नहीं कहा गया, क्योंकि हमारी सेना की क्षमताएं किसी से छिपी नहीं हैं। हमें सेना पर पूरा भरोसा : बब्बू सिंह गांव जोधा भैणी के युवक बब्बू सिंह का कहना है कि हमारा गांव जीरो लाइन (पाक सीमा) के बिल्कुल नजदीक है और हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है। हम गांव में ही डटे रहे। जब भारतीय सेना सीमा पर है तो हमें डरने की कोई बात नहीं है। इस तनावपूर्ण अवधि के दौरान दुश्मन द्वारा फाजिल्का की ओर ड्रोन से हमला भी किया गया था, लेकिन हमारी सेना ने इसे हवा में ही विफल कर दिया और कोई नुकसान नहीं हुआ। फाजिल्का के लोग हमेशा अपनी सेना के साथ मिलकर काम करते हैं और 1971 के युद्ध में जिस तरह हमारी महान सेना ने बलिदान देकर फाजिल्का को बचाया था, यहां के लोगों ने आसफवाला में युद्ध स्मारक बनाया है और हमेशा उसे श्रद्धांजलि देते हैं। एक बार फिर फाजिल्का जिले के लोग देश के रक्षकों के प्रति दिल से आभार व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। सेना के आने से बढ़ता है आत्मविश्वास : संजय पाकिस्तान सीमा से महज एक किलोमीटर दूर स्थित खानवाला गांव के संजय कुमार कहते हैं जब भी यहां सेना आती है, लोगों का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की तरह हम सीमावर्ती गांवों के लोगों को भी अपनी सेना पर गर्व है और मौजूदा हालात में हमारी रक्षा करने के लिए हम सेना के आभारी हैं। जब वे सीमा पर होते हैं, तो आम लोग शांति से सोते हैं। ऐसा ही उत्साह पक्का चिश्ती गांव के लोगों में देखने को मिला। चौपाल पर बैठे लोग कहते हैं, “अगर भारतीय सेना है, तो हम सुरक्षित हैं।”


