फास्ट ट्रैक ने बरी किया, पंचों ने हुक्का-पानी किया बंद:10 लाख जुर्माना, कोर्ट के दखल से FIR; बोला- अछूतों सी जिंदगी जी रहा परिवार

आत्महत्या के एक मामले में एक व्यक्ति ने 19 महीने की जेल काटी। इसके बाद बालोतरा फास्ट ट्रेक कोर्ट ने उसे मामले से बरी कर दिया। लेकिन खाप पंचायत की नजर में व्यक्ति दोषी रहा। पंचायत ने उसका हुक्का-पानी बंद किया और 10 लाख का आर्थिक दंड लगा दिया। परिवार न्याय के लिए भटकता रहा। 4 जनवरी को SP के हस्तक्षेप के बाद 11 पंचों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। मामला जालोर के भाद्राजून थाना इलाके के भोरड़ा गांव का है। पीड़ित भोरड़ा गांव निवासी हीराराम पुत्र सेलाराम ने बताया- 9 साल पहले 25 जून 2016 में बालोतरा जिले के समदड़ी थाना क्षेत्र के सुगतारी गांव निवासी युवक छोगाराम पटेल पुत्र नेमाराम ने सुसाइड किया था। पुलिस ने शक के आधार पर मुझे हिरासत में लिया और पूछताछ की। धारा 302/120B में 19 महीने तक जेल में भी रखा। बालोतरा फास्ट ट्रेक कोर्ट ने मुझे निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया। मैं अपने घर भोरड़ा (आहोर, जालोर) आ गया। 9 साल बाद खाप पंचायत ने कहा-तुम दोषी हो हीराराम ने बताया- 8 नवंबर 2024 को मुझे भोरड़ा गांव के सरपंच बगदाराम के घर बुलाया गया। मैं अपने भाई गणेशाराम के साथ वहां गया। वहां भोरड़ा (आहोर, जालोर) निवासी पंच कानाराम पुत्र सोनाराम चौधरी, खुशालाराम पुत्र सोनाराम, सरपंच बगदाराम पुत्र वेलाराम, खुशालाराम पुत्र रछोड़राम, गणेशाराम पुत्र तलाराम, जोगाराम पुत्र तलाराम, पन्नाराम पुत्र गोमाराम, छोगाराम पुत्र ओटाराम, अदरिंगाराम पुत्र भीमाराम, नारायणराम पुत्र गलाराम व राजाराम पुत्र गलाराम समेत अन्य लोग मौजूद थे। इस दौरान पंचों ने कहा- तुम पर हत्या के आरोप लगे थे। इस पर तुम्हारा क्या कहना है। हीराराम ने कहा- आरोप झूठे थे। न्यायालय ने मुझे बरी भी कर दिया था। पंचों ने कहा- न्यायालय ने भले तुम्हें बरी कर दिया हो लेकिन पंचायत तुम्हें अब भी दोषी मानती है। तुम्हें हुक्का-पानी बंद का फरमान सुना कर समाज से बहिष्कृत किया जाता है। साथ ही 10 लाख रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया जाता है। जब तक तुम जुर्माना राशि नहीं भरोगे, समाज से बाहर रहोगे। 3 महीने से परिवार जी रहा अछूत की जिंदगी हीराराम ने कहा- 3 महीने से हमारा परिवार गांव से दूर अछूत की जिंदगी जी रहा है। परिवार के सदस्य से न तो कोई बात करता है, न ही कोई सामान का लेन-देन करता है। अगर कोई हमसे व्यवहार रखेगा तो पंचायत उसे भी दंडित करेगी। इसी डर से हमसे गांव वाले किसी तरह का व्यवहार नहीं रखते। 27 नवंबर 2024 को परेशान होकर मैं भाद्राजून थाने पहुंचा और 11 पंचों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दी। पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। 29 नवंबर 2024 को मैं जालोर एसपी ज्ञानचंद्र यादव के सामने पेश हुआ। इसके बाद भी मामला दर्ज नहीं हुआ। तब मैं आहोर न्यायायिक मजिस्ट्रेट की शरण में गया। कोर्ट के दखल से 4 जनवरी को 11 पंचों के खिलाफ भाद्राजून थाने मामला दर्ज हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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