सरकारी स्कूलों की 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं अब 10वीं-12वीं की तरह बोर्ड पैटर्न पर होंगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने इन कक्षाओं की वार्षिक परीक्षा वर्ष में दो बार कराने का फैसला लिया है और पूरक परीक्षा का प्रावधान समाप्त कर दिया है। इससे किसी विषय में अनुत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी सीधे दूसरी परीक्षा में शामिल होकर उसी सत्र में अगली कक्षा में प्रवेश ले सकेंगे और उनका साल खराब नहीं होगा। बता दें कि पिछले साल हाई स्कूल और हायर सेकेंड्री में
पूरक परीक्षा समाप्त कर फेल विषयों की दोबारा परीक्षा की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। जून-जुलाई में हो सकती है दूसरी परीक्षा : इस सत्र की पहली वार्षिक परीक्षा 23 फरवरी से 17 मार्च तक आयोजित होगी। पहले चरण के परिणाम अप्रैल अंत तक आने की संभावना है। इसके बाद जून या जुलाई में दूसरी परीक्षा कराई जा सकती है। तब तक विद्यार्थियों को 10वीं और 12वीं में प्रोविजनल प्रवेश दिया जाएगा, ताकि अगस्त से नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रोविजनल प्रवेश भी फेल ही नहीं, पास विद्यार्थी भी दे सकेंगे दूसरी परीक्षा
पहली परीक्षा में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को दूसरा मौका मिलेगा। साथ ही कम अंकों से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं अंक सुधार के लिए भी दूसरी परीक्षा दे सकेंगे। बीमारी या अन्य कारणों से मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने वाले विद्यार्थियों को भी इसी परीक्षा से साल बचाने का अवसर मिलेगा। सफल होने पर विद्यार्थियों को उसी सत्र में अगली कक्षा में पदोन्नति दी जाएगी।
थानों में रहेंगे पेपर, परीक्षा के दिन सेंटर भेजे जाएंगे
9वीं और 11वीं भले ही होम एग्जाम हों लेकिन तैयारी बोर्ड जैसी पुख्ता है। इसके पेपर पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्रों पर भेजे जाएंगे। परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र भी ऑनलाइन जारी होंगे। आगे बढ़ने का अवसर
इस निर्णय का उद्देश्य ड्रॉपआउट दर कम करना और विद्यार्थियों को उसी सत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है। – मोहित गांधी, शिक्षाविद्


