बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दिया:ममता सरकार से मतभेद सामने आए थे; राज्य में इस साल विधानसभा चुनाव होंगे

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया है। फिलहाल वे दिल्ली में मौजूद हैं। डॉ बोस 23 नवंबर 2022 को बंगाल के राज्यपाल बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान कई बार राज्य की ममता बनर्जी सरकार और राजभवन के बीच मतभेद भी सामने आए थे। विशेष रूप से विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों, प्रशासनिक हस्तक्षेप और कुछ संवैधानिक मुद्दों को लेकर विवादों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में होती रही। कई मौकों पर राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली, जिससे यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रहा। बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में बढ़ते विवादों और राजनीतिक तनाव के बीच उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उनके द्वारा राष्ट्रपति को औपचारिक रूप से इस्तीफा भेजे जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वे पद छोड़ने का फैसला कर चुके हैं। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे को स्वीकार किए जाने या नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस संबंध में अगला निर्णय ले सकती है। CM ममता और राज्यपाल बोस के बीच सामने आए विवाद… 2023: विश्वविद्यालयों में VC नियुक्ति विवाद राज्यपाल बोस ने राज्य के कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर (VC) नियुक्त किए, जिस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार का आरोप था कि नियुक्तियां राज्य की सलाह के बिना हुईं। राज्यपाल ने कहा कि कानून के तहत यह उनका अधिकार है। मामला अदालत तक पहुंचा और उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। 2023-2024: राज्य विधेयकों को मंजूरी न देने का आरोप राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल कई विधेयकों पर मंजूरी में देरी कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने इसे ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा’ बताया था। राज्यपाल का पक्ष था कि विधेयकों की संवैधानिक जांच जरूरी है। इससे सरकार-राज्यपाल संबंध और तनावपूर्ण हुए। 2023: मनरेगा और केंद्रीय फंड पर टिप्पणी राज्यपाल ने मनरेगा सहित केंद्रीय योजनाओं में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। राज्य सरकार ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। दोनों पक्षों के बयानों से केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर पड़ा। 2023-24: राज्यपाल की जिलों की यात्राएं राज्यपाल के जिलों के दौरे और जनता से सीधे संवाद पर सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार ने कहा कि यह समानांतर प्रशासन जैसा है। राज्यपाल ने इसे जनता से जुड़ने का संवैधानिक दायित्व बताया था। 2024: महिला कर्मचारियों की सेक्शुअल हैरेसमेंट की शिकायतें पश्चिम बंगाल लोक भवन से जुड़े सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप सामने आए, जिस पर राज्य सरकार ने जांच और कार्रवाई की मांग की। राज्यपाल ने आरोपों को सिरे से खारिज किया और राजनीतिक दुर्भावना बताया। मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहा, लेकिन तनाव बढ़ता रहा।

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