प्रतापगढ़ में बंधुआ मजदूरी की रोकथाम, पहचान, रेस्क्यू और पुनर्वास पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ और गायत्री सेवा संस्थान उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को प्राधिकरण सभागार में हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले में बंधुआ मजदूरी से संबंधित मामलों में विभिन्न विभागों और संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि कार्यशाला में बंधुआ मजदूरी के मामलों में विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. पंड्या ने प्रतापगढ़ में हाल ही में सामने आए कुछ मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गड़रिया समुदाय के साथ बच्चों को ले जाने के एक प्रकरण में रेस्क्यू अभियान चलाया गया था। इसके अतिरिक्त, कुछ समय पहले अन्य राज्यों से 50 से अधिक लोगों को मुक्त कराकर वापस लाया गया। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। पुलिस थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, श्रम विभाग और बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ के सचिव केदारनाथ ने बताया कि कार्यशाला में अधिकारियों को बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें रेस्क्यू के दौरान आने वाली समस्याओं और उपलब्ध विधिक सहायता पर भी चर्चा की गई।


