जिले में कुल 3048 स्कूल हैं। इनमें से 2100 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जिनको मरम्मत की जरूरत है। जबकि, 480 जर्जर हाल में हैं। इनमें बच्चों को बैठाया तक नहीं जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि समग्र शिक्षा अभियान ने इन स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी सिर्फ एक एईएन के कंधों पर डाल रखी है। इनके नीचे 20 ब्लॉक पर केवल चार जेईएन लगे हैं। ये भी संविदा पर कार्यरत हैं। ऐसे में उदयपुर से लेकर सलूंबर जिले का काम फिलहाल इन्हें ही संभालना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल है। एईएन हेमसिंह का कहना है कि स्टाफ की कमी का असर काम पर न आए, इसके लिए वह दिन-रात काम में जुटे रहते हैं। घर-परिवार तक को समय नहीं दे पा रहे हैं। हर जेईएन के पास भी तीन-चार ब्लॉक का जिम्मा है। जेईएन व एईएन जिले के 480 जर्जर स्कूलों के लिए बारी-बारी से एस्टीमेट तैयार करने में जुटे हुए हैं। इसके अलावा उनपर निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग, 2100 से अधिक स्कूलों के मरम्मत के काम, जयपुर मुख्यालय के दौरे, सूचनाओं का आदान-प्रदान और विभागीय बैठकों की जिम्मेदारी भी है। बताया जा रहा है कि काम के दबाव के चलते पहले मुख्यालय पर कार्यरत जेईएन राकेश बोहरा ने 5 जनवरी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद से यह पद रिक्त पड़ा है। मुख्यालय पर जेईएन के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों लंबे समय से खाली पड़े हैं। जून 2025 में इन पदों को भरने के लिए इंटरव्यू तो लिए गए, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया कि किसे नियुक्त किया जाए। शिक्षा विभाग में इन पदों पर जो लोग पहुंचे, वे इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से नहीं थे, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया और उलझ गई। 20 ब्लॉक में 4 जेईएन, सभी संविदा पर जिले में एकमात्र एईएन हेमसिंह मुख्यालय पर तैनात हैं। चार जेईएन 20 ब्लॉकों का कार्य देख रहे हैं। इनमें बड़गांव में पंकज शर्मा (सिविल कंसलटेंट), मावली में दीपक त्रिवेदी, ऋषभदेव में विजय मेनारिया, गोगुंदा में चंद्रवीर सिंह तैनात हैं। ये चारों संविदा पर हैं और वर्ष 2015-16 से कार्यरत हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी तो इन कामों के लिए बजट तक नहीं आया। बजट आने के बाद जब इतनी ज्यादा संख्या में एकसाथ स्कूलों का काम चलेगा, तब सभी जगह देखरेख करना मुश्किल हो जाएगा। इससे गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। डीएमएफटी से जुड़े उदयपुर-सलूंबर के काम, स्टेट बजट से जुड़े निर्माण कार्य भी इन्हीं इंजीनियर्स को देखने पड़ रहे हैं। एईएन हेमसिंह के पास खेल मैदान, स्कूलों के टिन शेड, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कक्षा कक्ष, चारदीवारी और हॉस्टलों के निर्माण का जिम्मा भी है। इनमें उदयपुर के 8 और सलूंबर के 10 हॉस्टल शामिल हैं। ऐेसे में इन्हें छुट्टियों में भी काम करना पड़ता है। ये काम भी जेईएन के भरोसे कई स्कूलों में हादसे उदयपुर जिले में पिछले एक वर्ष में जर्जर सरकारी स्कूल भवनों से जुड़े कई हादसे सामने आए। वल्लभनगर में स्कूल की छत गिरी, जबकि कोटड़ा क्षेत्र में कक्षाएं ढह गईं। दो-तीन महीनों में हो जाएगी कार्मिकों की नियुक्ति : एडीपीसी जिले के समग्र शिक्षा अभियान के एडीपीसी ननिहालसिंह चौहान का कहना है कि काम जरूर बढ़े हैं, लेकिन उपलब्ध कार्मिकों में ही काम बांटकर किया जा रहा है। अन्य कई काम भी रहते हैं। जयपुर में साक्षात्कार हो चुके हैं, लेकिन नियुक्ति में दो-तीन महीने का समय लग सकता है। ऐसे में कुछ परेशानी जरूर हो रही है।


