भास्कर संवाददाता | चूरू खराब जीवनशैली के कारण छोटे बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के मामले बढ़ने लगे हैं। पिछले साल मई में खोले गए मिशन मधुहारी के तहत क्लिनिक पर अब तक टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 81 बच्चे आ चुके हैं। पिछले 6 महीने में इनमें से दो की मौत हो चुकी है। डॉक्टर्स का कहना है कि इनका संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित करीब 40 से 50 फीसदी बच्चे तो स्थानीय स्तर के अस्पताल में डॉक्टर्स से परामर्श लेकर काम चला रहे हैं। मिशन मधुहारी के तहत रतनगढ़ के जिला अस्पताल में क्लिनिक इसलिए खोला गया, क्योंकि चूरू का डीबीएच मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है। इस क्लिनिक को 8 मई 2025 को खोला गया। इसके लिए रतनगढ़ के डॉ. सुरेंद्र को राज्य स्तर पर बच्चों के इलाज के लिए ट्रेनिंग दी गई। कुछ समय उन्होंने क्लिनिक में बच्चों को परामर्श दिया। बाद में पीएमओ बनने पर डॉ. राजेंद्र धायल को इसका प्रभारी बनाया गया। पीएमओ डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि मिशन मधुहारी के तहत टाइप-1 मधुमेह से ग्रस्त 18 वर्ष की आयु तक के किशोर- किशोरियों के हैल्थ फॉलोअप, रेगुलर उपचार और दवा वितरण का कार्य माह के हर शुक्रवार को किया जा रहा है। इस दिन विशेषज्ञ चिकित्सक की ओर से हैल्थ चैकअप के लिए आने वाले टाइप-1 मधुमेह से ग्रस्त बच्चों को निशुल्क इंसुलिन, एक-एक ग्लूको मीटर तथा प्रतिमाह के लिए सौ की संख्या में ग्लूको स्ट्रिप निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी। क्लिनिक पर आने वाले बच्चों को एक डायरी दी जाती है, जिसमें रोज के शुगर लेवल की जानकारी लिखी जाती है। जांच के दौरान प्रभारी डॉक्टर इसका आकलन कर आगे के उपचार की सलाह देते हैं। रतनगढ़ के मधुहारी क्लिनिक पर आए 81 बच्चों में 55 बच्चे 2 से 10 आयुवर्ग के हैं। सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की योजना के तहत बच्चों में डायबिटीज कंट्रोल के लिए जिला अस्पतालों में मिशन मधुहारी के तहत क्लिनिक खोला गया है। यहां हर शुक्रवार को टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को परामर्श के साथ फ्री ग्लूको मीटर, इंसुलिन एवं ग्लूको स्टिप दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही चूरू के सैटेलाइट हॉस्पिटल में मिशन मधुहारी के तहत क्लिनिक खुलने की संभावना है। विभाग ने इस हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों को 27 फरवरी को ट्रेनिंग के लिए जयपुर बुलाया है। इस हॉस्पिटल में ये क्लिनिक शुरू होने से जिला मुख्यालय के इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को फ्री इलाज मिल सकेगा। डीबीएच के शिशु रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. इकराम का कहना है कि छोटे बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के मामले बढ़ते जा रहे हैं। एमसीएच में रोज एक से दो बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होकर जांच के लिए आ रहे हैं। बच्चों में इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली बीटा सिस्टम को डैमेज कर देता है। इससे टाइप-1 डायबिटीज का शिकार हो जाता है। यह ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होती है, जो खतरनाक मानी जाती है। ऐसे बच्चों का वजन कम होना, बिस्तर पर यूरीन आना, कम दिखाई देना, भूख एवं प्यास ज्यादा लगना है। ऐसी बीमारी को जुवेनाइल डायबिटीज भी कहते हैं, जिसका ज्यादा शिकार बच्चे ही होते हैं। डॉ. इकराम का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज को चीनी और जंक फूड कम करके, रोजाना व्यायाम एवं खेलकूद से कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा समय-समय ब्लड शुगर की जांच भी करवानी चाहिए।


