बड़वानी जिले में शनिवार की रात अब तक के सीजन की सबसे ठंडी रही। यहां न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री दर्ज किया गया, वहीं तीन दिन के दौरान हवा की गति में 6 किमी प्रति घंटे की तेजी आई है। इससे रात के साथ दिन में ठंडी हवा चलने लगी है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में शीतलहर चलने की संभावना जताते हुए एडवाइजरी जारी की है। कृषि विभाग केंद्र के अनुसार, रविवार सुबह 11 बजे 25.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। तापमान में अचानक कमी आने और तेज गति से सर्द हवा चलने से लोग दिन में भी गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं। सुबह व शाम को जगह-जगह अलाव जलने लगे हैं। नगर पालिका ने अब तक नहीं की अलाव की व्यवस्था हालांकि नगर पालिका ने अब तक शहर में सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की है। जिला अस्पताल, कोर्ट चौराहा और बस स्टैंड जैसे क्षेत्र में लोग रात के समय खुले आसमान में अलाव तापते नजर आए। शीतलहर का असर बढ़ेगा, वर्षा की संभावना कम कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह बड़ोरिया ने कहा कि हवा चलने और हवा में नमी होने से शीतलहर का असर बढ़ेगा। इस दौरान वर्षा की संभावना नहीं है। शीतलहर से शरीर को बचाने के लिए हाथ, पैरों की अंगुलियां, कान और नाक की ऊपरी सतह का ध्यान रखें। अत्यधिक ठंड से त्वचा, हाथ-पैर की अंगुलियों में रक्त वाहिकाएं संकरी होने से गर्मी की कमी से हृदय गति बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर में रक्त पंप करना कठिन हो जाता है। शीतलहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त और संवेदन शून्य तथा लाल फफोले पड़ सकते हैं। शीतलहर के पहले लक्षण पर ही डॉक्टर की सलाह लें। शीतलहर से बचाव के लिए गर्म कपड़े, दस्ताने, टोपी, मफलर, जलरोधी जूते आदि पहनें। जहां तक संभव हो, घर में रहें। बाहर यात्रा से बचें। विटामिन सी के लिए फल-सब्जियों का भरपूर सेवन करें। शीतलहर में विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है। जैसे फ्लू, सर्दी, खांसी और जुकाम आदि के लक्षण हों तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें। शरीर की प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल व सब्जियां लें तथा नियिमत रूप से गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें। कोहरे के दौरान वाहन धीमी गति में चलाएं। आगे-पीछे वाहनों से निर्धारित दूरी पर वाहन चलाएं। शीतलहर से बचाव के लिए स्प्रिंकलर से सिंचाई करें फसलों को पाले से बचाने के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि किसान अनाज को सुरक्षित भंडार गृह में रखने से पहले सफाई करें और मैलाथियान के 0.2 प्रतिशत के घोल का छिड़काव करें। शीतलहर का असर कम करने के लिए स्प्रिंकलर से सिंचाई करें। शीतलहर से पौधों के मुख्य तने के पास मिट्टी को काली या चमकीली प्लास्टिक शीट, घास या सरकंडे की घास से ढंकें, जो विकिरण अवशोषित कर मिट्टी को ठंडी में भी गर्म बनाए रखता है। पाले से बचने फसल पर रात में हलकी सिंचाई करें इसी तरह गेहूं की फसल में क्रउन रूट स्टेज (20-22 दिन) पर पहली सिंचाई करें। सरसों और चना में 35 से 40 दिन पर खेत में पर्याप्त नमी के लिए सिंचाई करें। पहली सिंचाई के बाद गेहूं की फसल में टॉप ड्रेसिंग के रूप में यूरिया के रूप में अनुशंसित नाइट्रोजन उर्वरक की 1/3 मात्रा दें। कम तापमान के पूर्वानुमान के कारण रबी की फसलों में पाला पड़ने की संभावना है। इसलिए फसलों को पाले से बचाने के लिए रात में हलकी सिंचाई करें। खेत में धुआं पैदा करने के लिए खते की मेड़ में कचरा जलाएं।


