तीन साल की देरी के बाद हुए रांची नगर निगम चुनाव ने शहर की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। इस बार वार्ड आरक्षण में बदलाव और लंबे अंतराल के बाद हुए मतदान ने कई अनुभवी पार्षदों की राह कठिन कर दी। वर्षों से वार्ड स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले कई दिग्गज उम्मीदवार चुनावी मैदान में टिक नहीं सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण के फेरबदल ने पारंपरिक समीकरणों को तोड़ा, वहीं लंबे अंतराल ने मतदाताओं की प्राथमिकताओं को भी बदल दिया। परिणामस्वरूप भाजपा, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित कई उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। हारने वाले प्रमुख चेहरों में अरूण झा, ओम प्रकाश, अशोक यादव, हुस्ना आरा, नाजिमा रजा, उर्मिला यादव, सुजाता कच्छप, मो फिरोज और प्रभुदयाल बड़ाईक जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से कुछ उम्मीदवार डिप्टी मेयर पद के प्रबल दावेदार भी माने जा रहे थे। बदली हुई राजनीति का संकेत : इस चुनाव ने यह साफ कर दिया कि नगर राजनीति अब पारंपरिक समीकरणों से आगे बढ़ रही है। मतदाता स्थानीय मुद्दों, उपलब्धता और कामकाज के आधार पर निर्णय ले रहे हैं। वार्ड आरक्षण, नए सामाजिक समीकरण और बदली राजनीतिक प्राथमिकताओं ने शहर की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया है। रांची की नगर राजनीति अब नई पीढ़ी, नए नेतृत्व और नए जनादेश के साथ आगे बढ़ने को तैयार दिख रही है। कई वार्डों में मतदाताओं ने पुराने जनप्रतिनिधियों को दोबारा मौका दिया। इनमें वार्ड-49 से जमीला खातून, वार्ड-45 से पप्पू गद्दी, वार्ड-9 से प्रीति रंजन, वार्ड-20 से सुनील यादव, वार्ड-21 से मो. एहतेशाम, वार्ड-34 से विनोद सिंह व वार्ड 3 से बसंती लकड़ा ने दोबारा जीत हासिल की। इन परिणामों ने यह स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर विकास कार्य और जनसंपर्क अब भी जीत का सबसे बड़ा आधार है। इन्होंने लगाई जीत की हैट्रिक
कुछ उम्मीदवारों ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर राजनीतिक मजबूती का संदेश दिया। वार्ड-18 से आशा गुप्ता, वार्ड-43 से शक्ति सिंह, वार्ड-1 से नकुल तिर्की, वार्ड-40 से सुचिता रानी राय ने जीत की हैट्रिक लगाई। इन परिणामों ने संकेत दिया कि कई वार्डों में मतदाताओं ने निरंतर नेतृत्व पर भरोसा कायम रखा। वार्ड 18 में हाई-प्रोफाइल मुकाबला, सोमवित हारे वार्ड 18 में चुनाव का सबसे कड़ा मुकाबला देखने को मिला। यहां राज्यसभा सांसद महुआ माजी के पुत्र सोमवित माजी और लगातार दो बार की पार्षद आशा गुप्ता आमने-सामने थे। जनता ने एक बार फिर आशा गुप्ता पर भरोसा जताते हुए उन्हें तीसरी बार पार्षद चुन लिया। इस जीत के साथ उन्होंने वार्ड राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। पर निर्णय ले रहे हैं। वार्ड आरक्षण, नए सामाजिक समीकरण और बदली राजनीतिक प्राथमिकताओं ने शहर की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया है। रांची की नगर राजनीति अब नई पीढ़ी, नए नेतृत्व और नए जनादेश के साथ आगे बढ़ने को तैयार दिख रही है।


